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चेहरे क्यों हैं मलीन

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२१२२ २१२२ २१२२ २ चेहरे क्यों हैं मलीन,..... जिन्दगी को आदमी, आम की, नजर देखो रख कभी सीने , वजन कोई , पत्थर देखो डूबने लग जाए, स्वयं ही वजूद कभी लहर उठती,रह किनारे, समुंदर देखो आग नफरत की लगाकर, जो ...

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लेखक के बारे में
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सुशील यादव

जन्म 30 जून 1952 दुर्ग छत्तीसगढ़ रिटायर्ड डिप्टी कमीश्नर , कस्टम्स,सेन्ट्रल एक्साइज एवं सर्विस टेक्स व्यंग ,कविता,कहानी का स्वतंत्र लेखन |रचनाएँ स्तरीय मासिक पत्रिकाओं यथा कादंबिनी ,सरिता ,मुक्ता तथा समाचार पत्रं के साहित्य संस्करणों में प्रकाशित |अधिकतर रचनाएँ gadayakosh.org ,रचनाकार.org ,अभिव्यक्ति ,उदंती ,साहित्य शिल्पी ,एव. साहित्य कुञ्ज में नियमित रूप से प्रकाशित |

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Arun Sharma
    09 जून 2019
    बहुत ही लाजवाब गजल
  • author
    16 अगस्त 2018
    उत्तम रचना
  • author
    07 मार्च 2019
    बहुत सुन्दर लिखा है आपने 👍👍👌
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    Arun Sharma
    09 जून 2019
    बहुत ही लाजवाब गजल
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    16 अगस्त 2018
    उत्तम रचना
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    07 मार्च 2019
    बहुत सुन्दर लिखा है आपने 👍👍👌