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चश्मे जहाँ से हालते असली नहीं छुपती

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चश्मे जहाँ से हालते असली नहीं छुपती अख्बार में जो चाहिए वह छाप दीजिए| दावा बहुत बड़ा है रियाजी मे आपको तूले शबे फिराक को तो नाप दीजिए | सुनते नहीं हैं शेख नई रोशनी की बात इंजन कि उनके कान में अब भाप...

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लेखक के बारे में

मूल नाम : अकबर हुस्सैन रिज़वी उपनाम : अकबर अलाहाबादी जन्म : 16 नवंबर 1846 देहावसान: 15 फरवरी 1921 भाषा : उर्दू विधाएँ : ग़ज़ल, शायरी अकबर अलाहाबादी उर्दू व्यंग्य के अग्रणी रचनाकारों में से एक हैं, इनके काफी शेरों एवम ग़ज़लों में सामाजिक दर्द को सरल भाषा में हास्यपूर्क ढंग से उकेरा गया है। "हंगामा है क्यूं बरपा" इनकी मशहूर ग़ज़लों में से एक है

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    26 जनवरी 2020
    उर्दू के मुश्किल शब्दों का हिंदी तर्जुमा भी दे दें तो समझने और मजा लेने में आसानी होगी।
  • author
    Manisha Pareek
    20 मई 2019
    bohot hi umda gazals hai..
  • author
    Abhishek Sharma
    10 जून 2020
    उम्दा रचना
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    26 जनवरी 2020
    उर्दू के मुश्किल शब्दों का हिंदी तर्जुमा भी दे दें तो समझने और मजा लेने में आसानी होगी।
  • author
    Manisha Pareek
    20 मई 2019
    bohot hi umda gazals hai..
  • author
    Abhishek Sharma
    10 जून 2020
    उम्दा रचना