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चांदनी रात में

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चांदनी रात में क्यों इश्क़ निखर जाता है होठ खामोश हों और दर्द बिखर जाता है....... औंस की बूंद आहिस्ता से कहीं गिरती है फिर अनायास कोई शोख कली खिलती है चांद धीरे से मुस्कुराके राह अपनी चले तारों ...

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लेखक के बारे में
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बीरा नेगी
समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    निरंजना जैन
    09 मई 2023
    'कहीं मिलन,तो कहीं पर विरह सा छाता है,चाँदनी रात में इश्क क्यों निखर जाता है।' बेहद खूबसूरत और मनभावन प्रस्तुति आपकी।👍👌👌👌👌
  • author
    वाह क्या बात है लाजवाब लेखन आपके द्वारा,, इश्क की सुंदर दास्तां प्रस्तुत किया आपने, सुंदर अतिसुंदर विचार प्रस्तुत किया आपने।।🙏🙏 राधे-राधे 🙏🥀🥀🥀🌺🥀🥀🥀
  • author
    Ram Pratap Prasad
    09 मई 2023
    चांद, चांदनी और इश्क का याराना, बहुत पुराना है, कभी मिलन, कभी विरह का आशियाना है। बहुत कलात्मक, छायावादी कविता, लाजबाव ❤️🙏
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    निरंजना जैन
    09 मई 2023
    'कहीं मिलन,तो कहीं पर विरह सा छाता है,चाँदनी रात में इश्क क्यों निखर जाता है।' बेहद खूबसूरत और मनभावन प्रस्तुति आपकी।👍👌👌👌👌
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    वाह क्या बात है लाजवाब लेखन आपके द्वारा,, इश्क की सुंदर दास्तां प्रस्तुत किया आपने, सुंदर अतिसुंदर विचार प्रस्तुत किया आपने।।🙏🙏 राधे-राधे 🙏🥀🥀🥀🌺🥀🥀🥀
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    Ram Pratap Prasad
    09 मई 2023
    चांद, चांदनी और इश्क का याराना, बहुत पुराना है, कभी मिलन, कभी विरह का आशियाना है। बहुत कलात्मक, छायावादी कविता, लाजबाव ❤️🙏