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चांद छुपा है कहीं बादलों में

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कभी उनके जुल्फों के छांव में गुज़रे उन लम्हों को आज हम खुले आसमान के तारों के नीचे बैठ कर याद कर रहे हैं चांदनी रात तो है मगर चांद कहीं छिपा है बादलों में उसके लौटने के इन्तजार में तारों को गिनकर...

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लेखक के बारे में
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Tafizul Hussain

में एक कारवां हूं। जुड़ें मेरे साथ जाने जिंदगी को

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Balram Soni
    11 अगस्त 2021
    बहुत ही शानदार रचना आपकी जय श्री राधे कृष्णा🙏
  • author
    Neetu Singh
    11 अगस्त 2021
    बहुत सुंदर रचना आपकी👌👌👌👌👌🙏
  • author
    Ritu Goel
    11 अगस्त 2021
    अति सुन्दर अभिव्यक्ति
  • author
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  • author
    Balram Soni
    11 अगस्त 2021
    बहुत ही शानदार रचना आपकी जय श्री राधे कृष्णा🙏
  • author
    Neetu Singh
    11 अगस्त 2021
    बहुत सुंदर रचना आपकी👌👌👌👌👌🙏
  • author
    Ritu Goel
    11 अगस्त 2021
    अति सुन्दर अभिव्यक्ति