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चालीस साला औरतें

4.5
1252

इन अलसाई आँखों ने रात भर जाग कर खरीदे हैं कुछ बंजारा सपने सालों से पोस्टपोन की गई उम्मीदें उफान पर हैं कि पूरे होने का यही वक्त तय हुआ होगा शायद अभी नन्हीं उँगलियों से जरा ढीली ही हुई है इन हाथों ...

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लेखक के बारे में
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अंजू शर्मा

anjuvsharma2011@gmail.com कुल आठ किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। दो जल्दी ही आने वाली हैं। जिनमें दो कविता संग्रह, पाँच कहानी संग्रह, तीन उपन्यास हैं। बहुत सारे पुरस्कारों से सम्मानित, साहित्य के क्षेत्र में करीब पंद्रह वर्ष से खूब सक्रिय नाम।

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    मनोज गुप्ता "#man0707"
    03 जून 2021
    waah अंजू जी, क्या बयान किया है आपने उम्र के इस पड़ाव को :) सोचता हूँ क्यों ना आपकी कविता का पुरुष version लिख दूँ :) पर फिर जब आपका लेखन स्तर देखता हूँ , तो घबरा गया हूँ :) शायद नहीं कर पाऊँगा :)
  • author
    Prita Singh
    04 अगस्त 2021
    लगा कि दिल की बाते कितनी सहजता से लिख डाली।तारीफ करना चाहती हूँ पर शब्द नही मिल रहे,बस यही कहूंगी लिखा है आपने दिल का वो फसाना जो कब से दिल कहना चाहता था। बहुत ही सुंदर लिखा।
  • author
    Aabha
    07 दिसम्बर 2021
    uffffff!!!!!!! itni gahrai se likh diya aapne unn chalis saala auraton ka man..... pura ka pura ukerkar rakh diya.... sadhuvaad!!!!!
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    मनोज गुप्ता "#man0707"
    03 जून 2021
    waah अंजू जी, क्या बयान किया है आपने उम्र के इस पड़ाव को :) सोचता हूँ क्यों ना आपकी कविता का पुरुष version लिख दूँ :) पर फिर जब आपका लेखन स्तर देखता हूँ , तो घबरा गया हूँ :) शायद नहीं कर पाऊँगा :)
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    Prita Singh
    04 अगस्त 2021
    लगा कि दिल की बाते कितनी सहजता से लिख डाली।तारीफ करना चाहती हूँ पर शब्द नही मिल रहे,बस यही कहूंगी लिखा है आपने दिल का वो फसाना जो कब से दिल कहना चाहता था। बहुत ही सुंदर लिखा।
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    Aabha
    07 दिसम्बर 2021
    uffffff!!!!!!! itni gahrai se likh diya aapne unn chalis saala auraton ka man..... pura ka pura ukerkar rakh diya.... sadhuvaad!!!!!