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चाहत

3.9
597

चला हूँ मैं घर से दिलबर की चाह में कहीं वो मुझे मिल जाए चलते ही राह में । मौत ना हो मेरी-2 मिलने की आह में दम निकले तो फि ग़म नहीं प्रियतम की बांह में । प्रेम है उसके लिए -2 मेरी निग़ाह में न रुका ...

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लेखक के बारे में

स्नातकोत्तर, बी एड, हिंदी अनुवादक

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Jai Sharma
    19 मार्च 2023
    राधे राधे लोकेश जी बहुत बढ़िया जी
  • author
    Gobind Bizlot ""रातिब""
    24 फ़रवरी 2019
    👌👌👌👌👌
  • author
    09 जून 2018
    अतिसुंदर।
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  • author
    Jai Sharma
    19 मार्च 2023
    राधे राधे लोकेश जी बहुत बढ़िया जी
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    Gobind Bizlot ""रातिब""
    24 फ़रवरी 2019
    👌👌👌👌👌
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    09 जून 2018
    अतिसुंदर।