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बस तुम देना साथ मेरा

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ये कहानी है ऋतु की जहां उसका पति उसका पूरा साथ देता है उसे दोबारा से अपनी नौकरी शुरू करने में

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लेखक के बारे में

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से एम कॉम करने के बाद , पिछले कुछ समय से लिखना शुरू किया , अपनी लेखनी के माध्यम से कुछ अधूरे किस्से पूरे करती हूं , कुछ सामाजिक बुराईयों का हल ढूंढने की कोशिश भी करती हूं , जिसके माध्यम से समाज को अच्छा सन्देश दे सकूँ , हाल ही में शिकायत प्रतियोगिता में सांत्वना पुरस्कार मिलने से सकारात्मक भाव आया है , समाचार पत्रों में समय समय पर लेख , कवितायें प्रकाशित होती है , आज लेखनी में जो भी पहचान बना पाई हूँ , उसका पूरा श्रेय मेरी मां को जाता है जो अब हमारे बीच नही है अगर अच्छी लेखक बन पाऊं तो उन्हें ये मेरी सच्ची श्रद्धाजंलि होगी ।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Kavita Babel
    25 जुलाई 2019
    aise pati kaha Hote hai. per soch Kar Mann ko bahut Khushi mili ki aisa ho to sakta hai
  • author
    Kamlesh Solanki
    18 अप्रैल 2018
    kash sabhi betion ko aisa hi saathi mile congratulations Neha ji gagar me sagar
  • author
    raavii kaur
    08 सितम्बर 2019
    har husband ko apni wife ka aise hi dhyan Rakhna chahiye
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    Kavita Babel
    25 जुलाई 2019
    aise pati kaha Hote hai. per soch Kar Mann ko bahut Khushi mili ki aisa ho to sakta hai
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    Kamlesh Solanki
    18 अप्रैल 2018
    kash sabhi betion ko aisa hi saathi mile congratulations Neha ji gagar me sagar
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    raavii kaur
    08 सितम्बर 2019
    har husband ko apni wife ka aise hi dhyan Rakhna chahiye