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बिना मंजिल की राह..

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पता ही नहीं, मैं कौन सी  राहों पे चलके आ गई, जहाँ कोई मंजिल ही नहीं थी.. बारिशें तो हो रही थी, पर प्यास बुजाने का पानी नहीं था, पता ही नहीं, मैं कौन सी राहो पे... ढूंढ रही थी उसे में, की कही वो नजर ...

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लेखक के बारे में
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Ekta Chauhan

કાન્હા ની મીરાં.. દુનિયાની રીતભાત ને જાણતી, છતાં અજાણ.. ભીડમાં પણ એકલી ફરતી..એવી એક મીરાં..

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Tarak
    28 जून 2020
    ખુબ જ સરસ
  • author
    V S
    14 जून 2020
    very nice
  • author
    પંકજ જાની
    14 जून 2020
    સરસ
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    Tarak
    28 जून 2020
    ખુબ જ સરસ
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    V S
    14 जून 2020
    very nice
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    પંકજ જાની
    14 जून 2020
    સરસ