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बिन ब्याही शहीद की विधवा

4.6
37334

मॉल के बाहर गाड़ी पार्क कर निकल ही रही थी कि पीछे से जानी पहचानी आवाज सुनाई दी शिल्पी दीदी। मैंने पीछे मुढ़कर देखा अरे पिंकी तुम यहां..... क्या कर रही हो? उसने बड़े प्यार से पीछे से पकड़ते हुए कहा ...

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लेखक के बारे में

  मैं दिल से इंसान, दिमाग से पत्रकार, स्वभाव से आजाद और थोड़ी सी बागी हूं। उत्तर प्रदेश के जिला एटा के एक छोटे से गांव से निकलकर पहले उत्‍तराखंड से शिक्षा और फिर दिल्‍ली में नौकरी की शुरुआत हुई, तब से बस दिल्ली की हूं।  दीप्ति मिश्रा ... (चुलबुली ) चमक, ज्‍वाला, रोशनी, लौ... ये सब वैसे तो मेरे नाम के ही अर्थ हैं, लेकिन यह कह पाना मुश्किल है कि ये सभी मेरे व्यक्तित्व से मेल खाते हैं। मुझे दूसरों को जलाना नहीं आता, हां कभी कभार दूसरे के लिए खुद को जला लेती हूं। भावनाओं के बजाय शब्‍दों से खेलना अच्‍छा लगता है।  लेखन का दायरा बहुत व्‍यापक है और लेखन की एक नहीं अनेक विधाएं हैं। मुझे कौन सी आती है, यह तो आप मेरी कहानियों को पढ़ने के बाद स्‍वयं समझ लेंगे। हिंदी साहित्य की मुझे बहुत गहरी जानकारी तो नहीं, लेकिन मेरा मानना है कि भावनाओं के मामले में ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती है। कभी अपना दर्द, तो कभी दूसरे के दर्द को अपना समझकर दिल-दिमाग में जो विचार कौंधें उन्हें शब्दों के रूप में कागज पर उतार देती हूं। यह फिर यूं कहो कि जिंदगी में आने वाले उतार-चढ़ाव को शब्दों में बंया कर देती हूं। बात जहां तक मेरे परिवार की है, तो हमेशा से इंसानियत के रिश्तों को वरीयता दी है।

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Shubham Singh
    19 फेब्रुवारी 2019
    मैं एक पुलिस वाला हूं लेकिन इस कहानी को पढ़कर मेरे आंखों से अनायास आंसू बहने लगे बहुत ही अच्छी कहानी जितनी तारीफ की जाए उतनी कम एक एक शब्द जीवंत हैं जय हिंद
  • author
    Beena Awasthi
    27 फेब्रुवारी 2019
    लाजवाब कहानी। शहीदों से अधिक नमन का हकदार उसका परिवार, उसका प्यार होता है।
  • author
    प्रशान्त कुमार
    21 फेब्रुवारी 2019
    दीदी ये कहानी या हकीकत ???
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  • author
    Shubham Singh
    19 फेब्रुवारी 2019
    मैं एक पुलिस वाला हूं लेकिन इस कहानी को पढ़कर मेरे आंखों से अनायास आंसू बहने लगे बहुत ही अच्छी कहानी जितनी तारीफ की जाए उतनी कम एक एक शब्द जीवंत हैं जय हिंद
  • author
    Beena Awasthi
    27 फेब्रुवारी 2019
    लाजवाब कहानी। शहीदों से अधिक नमन का हकदार उसका परिवार, उसका प्यार होता है।
  • author
    प्रशान्त कुमार
    21 फेब्रुवारी 2019
    दीदी ये कहानी या हकीकत ???