भूल गये तुमको, यूँ बातों ही बात में हम इतने भीगे तनहा बारिश,-बरसात में हम ज़ुल्म -सितम क्या जानो, सहना पड़ता इतना फिर छोटी कुटिया,फिर वो ही औकात में हम जिस हाल में हम हैं, सहने की क्षमता टूटी क्षीण हुए ...
जन्म 30 जून 1952 दुर्ग छत्तीसगढ़
रिटायर्ड डिप्टी कमीश्नर ,
कस्टम्स,सेन्ट्रल एक्साइज एवं सर्विस टेक्स
व्यंग ,कविता,कहानी का स्वतंत्र लेखन |रचनाएँ स्तरीय मासिक पत्रिकाओं यथा कादंबिनी ,सरिता ,मुक्ता तथा समाचार पत्रं के साहित्य संस्करणों में प्रकाशित |अधिकतर रचनाएँ gadayakosh.org ,रचनाकार.org ,अभिव्यक्ति ,उदंती ,साहित्य शिल्पी ,एव. साहित्य कुञ्ज में नियमित रूप से प्रकाशित |
सारांश
जन्म 30 जून 1952 दुर्ग छत्तीसगढ़
रिटायर्ड डिप्टी कमीश्नर ,
कस्टम्स,सेन्ट्रल एक्साइज एवं सर्विस टेक्स
व्यंग ,कविता,कहानी का स्वतंत्र लेखन |रचनाएँ स्तरीय मासिक पत्रिकाओं यथा कादंबिनी ,सरिता ,मुक्ता तथा समाचार पत्रं के साहित्य संस्करणों में प्रकाशित |अधिकतर रचनाएँ gadayakosh.org ,रचनाकार.org ,अभिव्यक्ति ,उदंती ,साहित्य शिल्पी ,एव. साहित्य कुञ्ज में नियमित रूप से प्रकाशित |
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