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भूल गये तुमको

4.2
524

भूल गये तुमको, यूँ बातों ही बात में हम इतने भीगे तनहा बारिश,-बरसात में हम ज़ुल्म -सितम क्या जानो, सहना पड़ता इतना फिर छोटी कुटिया,फिर वो ही औकात में हम जिस हाल में हम हैं, सहने की क्षमता टूटी क्षीण हुए ...

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लेखक के बारे में
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सुशील यादव

जन्म 30 जून 1952 दुर्ग छत्तीसगढ़ रिटायर्ड डिप्टी कमीश्नर , कस्टम्स,सेन्ट्रल एक्साइज एवं सर्विस टेक्स व्यंग ,कविता,कहानी का स्वतंत्र लेखन |रचनाएँ स्तरीय मासिक पत्रिकाओं यथा कादंबिनी ,सरिता ,मुक्ता तथा समाचार पत्रं के साहित्य संस्करणों में प्रकाशित |अधिकतर रचनाएँ gadayakosh.org ,रचनाकार.org ,अभिव्यक्ति ,उदंती ,साहित्य शिल्पी ,एव. साहित्य कुञ्ज में नियमित रूप से प्रकाशित |

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    प्रिया सिंह "Life🧬"
    01 अक्टूबर 2018
    बहुत सुन्दर रचना। भाव बिभोर करती
  • author
    Rajendra Gaur
    30 अगस्त 2021
    सुंदर रचना
  • author
    Sikandar Vadia
    30 सितम्बर 2018
    very nice
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  • author
    प्रिया सिंह "Life🧬"
    01 अक्टूबर 2018
    बहुत सुन्दर रचना। भाव बिभोर करती
  • author
    Rajendra Gaur
    30 अगस्त 2021
    सुंदर रचना
  • author
    Sikandar Vadia
    30 सितम्बर 2018
    very nice