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भिखारी

4.8
458

मेरी गली में इक भिखारी भीख मांगता है, नंगे पाँव, तपती धूप में, सर्दी-गर्मी, हर रूप में, चंद मुट्ठी पैसों से, घर का पेट पालता है, मेरी गली में इक भिखारी, रोज भीख मांगता है।। टूटे घर में बिखरा जीवन, ...

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लेखक के बारे में
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एस. कमलवंशी
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    KD Kushwaha "Kishan"
    29 ജനുവരി 2019
    बहुत सुंदर मैने भी अपनी एक रचना में भिखारी की व्यथा दर्शाने की कोशिश की है आप जरूर पढ़े।
  • author
    दीपक शर्मा
    18 ഡിസംബര്‍ 2018
    बहुत बढिया
  • author
    24 ആഗസ്റ്റ്‌ 2018
    दिल को छू गया
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    KD Kushwaha "Kishan"
    29 ജനുവരി 2019
    बहुत सुंदर मैने भी अपनी एक रचना में भिखारी की व्यथा दर्शाने की कोशिश की है आप जरूर पढ़े।
  • author
    दीपक शर्मा
    18 ഡിസംബര്‍ 2018
    बहुत बढिया
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    24 ആഗസ്റ്റ്‌ 2018
    दिल को छू गया