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भेड़िये का खोल

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सत्ता विमुख स्वार्थी नेताओं के बोल जुबाँ के साथ जिस्म में दोगली घोल सत्ता के खातिर खुद को बेचनेवालों गीदड़ जैसे डाले भेड़िये का खोल। कुत्ते की दुम कभी सीधी नहीं होती चाल भी, सांप की सीधी नहीं होती ...

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लेखक के बारे में

श्याम स्नेही शास्त्री, सम्प्रदायों से इतर ईश्वर निरुपक, स्वर विज्ञान द्वारा बगैर औषधि के स्वास्थ्य रक्षण एवं समसामयिक लेखन।

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    निक्की सिंह
    23 सितम्बर 2019
    एकदमे सही लिखें हैं आप,पर नेताओं से इतनी नफ़रत ,ठीक बात नाही है
  • author
    Manjit Singh
    23 मार्च 2021
    कुछ नेता अच्छे भी होते है
  • author
    मल्हार
    03 जून 2020
    👌👌👌💐💐🙏🙏
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    निक्की सिंह
    23 सितम्बर 2019
    एकदमे सही लिखें हैं आप,पर नेताओं से इतनी नफ़रत ,ठीक बात नाही है
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    Manjit Singh
    23 मार्च 2021
    कुछ नेता अच्छे भी होते है
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    मल्हार
    03 जून 2020
    👌👌👌💐💐🙏🙏