pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

भगवान ने आपको चुना हैं

4.8
1616

उस दिन सबेरे 6 बजे मैं अपने शहर से दूसरे शहर जाने के लिए निकला, मैं रेलवे स्टेशन पहुचा, पर देरी से पहुचने कारण मेरी ट्रेन निकल चुकी थी, मेरे पास 9.30 की ट्रेन के आलावा कोई चारा नही था मैंने सोचा कही ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में
author
Deepak SINGLA

पेशे से वकील लेकिन दिल से कलाकार

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    राहुल (देव)
    22 ఆగస్టు 2018
    दीपक जी... बहुत अच्छी रचना है आपकी ये... परंतु कई बार, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो हमसे पैसे तो लेते हैं खाने के नाम पे, लेकिन उसका उपयोग गलत कामों में करते हैं। उचित यह होगा कि उन्हें, कोई खाने का सामान दें, और उसका wrapper फाड़ दें, ताकि वो वापस से उसे उसी दुकान पे काम रेट में न बेच पाए, और उसका उपभोग ही करें...
  • author
    विवेक गर्ग
    02 సెప్టెంబరు 2018
    वाकई हम तो एक जरिया ही है। करता तो सब वो ही है।
  • author
    Sunita Thakur
    20 నవంబరు 2018
    bhut hi khubsurat rachna
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    राहुल (देव)
    22 ఆగస్టు 2018
    दीपक जी... बहुत अच्छी रचना है आपकी ये... परंतु कई बार, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो हमसे पैसे तो लेते हैं खाने के नाम पे, लेकिन उसका उपयोग गलत कामों में करते हैं। उचित यह होगा कि उन्हें, कोई खाने का सामान दें, और उसका wrapper फाड़ दें, ताकि वो वापस से उसे उसी दुकान पे काम रेट में न बेच पाए, और उसका उपभोग ही करें...
  • author
    विवेक गर्ग
    02 సెప్టెంబరు 2018
    वाकई हम तो एक जरिया ही है। करता तो सब वो ही है।
  • author
    Sunita Thakur
    20 నవంబరు 2018
    bhut hi khubsurat rachna