"...यह प्रवृत्ति पुरातन मानवों में भी देखी गई है। 'निएंडरथल' मानवों के पूर्वज थे जो होमोसेपियन्स से भी पहले अस्तित्व में थे। इन्होंने हज़ारों वर्ष तक धरती पर राज़ किया था। ईराक की शेनिडार गुफाओं ...
हमेशा की तरह बेहतरीन तरीके से लिखा है आपने। आप एक छोटी सी कहानी को भी पूरी गंभीरता के साथ लिखते हैं। रहस्य और रोमांच अंत तक बरकरार रहा। पहले कुछ पर की राहत कि सब ठीक है। कुछ इतना भयावह भी नहीं जितना हम सोच रहे हैं। फिर अगले ही पल वही राहत हवा हो जाती है। लगता है मृदुल वापस नहीं जाने पाया। ये बात इसे और भी डरावना बनाती है। बेहतरीन शुरुआत
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अभी अभी तो वृत के सहर से बाहर निकले थे (पूरी तरह नही) बलि का नाम सुनकर ही तमदेलनी और उस कमीने सोहम का चेहरा याद आ जाता है और आज एक और धमाका 💁♀️💁♀️
यहाँ तो गंगाधर ही शक्तिमान निकला, वो सुदर्शन ही आदिवासियों का देवता या शैतान निकला।
एक तो मुझे ये समझ नही आता है की ये सारे खतरा उठाने वाले अपनी प्रेग्नेंट बीवियों को घर पर अकेला छोड़ कर क्यों चले आते हैं🤦♀️, अब मृदुल को ही देखो , घर पर बच्चा आने वाला है, किराया नही भरा अब तक और पहुँच गए पंजर गाँव, और किस्मत देखो, टकराये भी तो किससे 🤦♀️
लगता है मृदुल बचेगा नही, लेकिन क्या उसका मोबाइल उसकी बीवी तक पहुँच पायेगा, अब ये तो आगे ही पता चलेगा।
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ऐसा लग रहा था जैसे पूरे टाइम मैं ही जंगल में थी, मैंने ही चाय पी और फ़िर वो बलि का दृश्य.... उफ़ उस आग की तपन मुझे महसूस हो रही थी, गला सूख गया था डर के मारे... और वो बाघ..उसने तो किसी अदृश्य अलौकिक के लिए विश्वास जाग्रत कर दिया मन में... पता नहीं अब आगे क्या होगा?!
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एक तो मुझे ये समझ नही आता है की ये सारे खतरा उठाने वाले अपनी प्रेग्नेंट बीवियों को घर पर अकेला छोड़ कर क्यों चले आते हैं🤦♀️, अब मृदुल को ही देखो , घर पर बच्चा आने वाला है, किराया नही भरा अब तक और पहुँच गए पंजर गाँव, और किस्मत देखो, टकराये भी तो किससे 🤦♀️
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