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बेटी हुईं परायी

4.5
167

प्यारे बाबुल की दुल्हारी, निज शौहर की होने परछाई, बाबुल की आँखे चली डबडबाई, बेटी हुयी पराई । माँ की आँखों का पानी,   प्रेम, स्नेह की बनने सानी निजजननी को चली रुलाती, बेटी हुयी पराई। स्व्आँगन की ...

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लेखक के बारे में

राजस्थान के प्रवेश द्वार से नाता है मेरा, ग्रामीण परिवेश में पला बड़ा होने के कारण मुझे गाँव की संस्कृति, संस्कार, परम्पराओ से विशेष लगाव है। सम्पर्क सूत्र :-8426001129.

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Renu
    21 जून 2018
    भावपूर्ण विदाई रचना | हर बेटी बाबुल के आंगन से ऐसी ही मधुर यादों और लाड - मनुहार के साथ विदा होती है | शुभकामना |
  • author
    एम. रोहित
    05 अप्रैल 2020
    बेहद भावुक और कटु यथार्थ लिए प्रासंगिक काव्य-रचना , अद्भुत भाईसाहब 👌
  • author
    BHUSHAN KHARE
    19 जून 2018
    बेहतरीन लेखन. पढ़ कर बहुत अच्छा लगा.
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    Renu
    21 जून 2018
    भावपूर्ण विदाई रचना | हर बेटी बाबुल के आंगन से ऐसी ही मधुर यादों और लाड - मनुहार के साथ विदा होती है | शुभकामना |
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    एम. रोहित
    05 अप्रैल 2020
    बेहद भावुक और कटु यथार्थ लिए प्रासंगिक काव्य-रचना , अद्भुत भाईसाहब 👌
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    BHUSHAN KHARE
    19 जून 2018
    बेहतरीन लेखन. पढ़ कर बहुत अच्छा लगा.