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बेटिया

4.3
7484

चार बेटीयोँ के पिता रामलाल का पार्थिव शरीर आंगन में पङा था ।सब तरफ से घिरा जमावङा आपस में फुसफुसा रहा था कि अब क्या होगा ? कौन कांधा और मुखग्नि देगा इसकी अर्थी को ।बङा घमंड था इसे अपनी बेटीयों पर ...

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लेखक के बारे में
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एकता सारदा

नाम - एकता सारदा पता - सूरत (गुजरात) सम्प्रति - स्वतंत्र लेखन प्रकाशित सांझा काव्य संग्रह - अपनी-अपनी धरती , अपना-अपना आसमान , अपने-अपने सपने(2014) [email protected]

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Raj Gavit "Rajubaba"
    25 अक्टूबर 2018
    Excellent Madam ji . Boys Girls are both Same. Nice Concept I am going to make a short film .
  • author
    Jugraj Dhamija Advocate
    14 फ़रवरी 2019
    सुंदर पर आखिरी लाइन सही नही। बेटा बन के दिखाएंगी गलत लगा। बेटे बेटी में कोई फर्क नही।
  • author
    Rishu verma
    28 अप्रैल 2020
    हर लड़की को इनसे सीख लेकर लोगो की दकियानूसी सोच को बदलना चाहिए।
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    Raj Gavit "Rajubaba"
    25 अक्टूबर 2018
    Excellent Madam ji . Boys Girls are both Same. Nice Concept I am going to make a short film .
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    Jugraj Dhamija Advocate
    14 फ़रवरी 2019
    सुंदर पर आखिरी लाइन सही नही। बेटा बन के दिखाएंगी गलत लगा। बेटे बेटी में कोई फर्क नही।
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    Rishu verma
    28 अप्रैल 2020
    हर लड़की को इनसे सीख लेकर लोगो की दकियानूसी सोच को बदलना चाहिए।