सीमा की खुशी का ठिकाना नहीं था जब से सुना था उसके बेटे अनूप को दिल्ली ,आई आई टी में एम टेक में अड्मिशन मिल गया था।पूरे मोहल्ले में मिठाई बंटवा दी थी,कथा भी करवा दी थी घर में,ख़ुशी से फूली न समाती ...
मुझे शुरू से ही कहानी,कविताओं को पढ़ने,लिखने का शौक रहा है।साहित्य में रुचि हमेशा रही इसलिए बी ए में अंग्रेजी ,संस्कृत साहित्य दोनों पढ़े फिर एम ऐ, एम फिल ,पी एच डी अंग्रेजी साहित्य में करी। यू पी एच् ई एस सी से चयनित हो कुछ वर्ष अंग्रेजी साहित्य की प्रवक्ता रही पर पारिवारिक मजबूरियों के चलते त्यागपत्र दे दिया।जब से प्रतिलिपि से जुड़ी हूं, पुरानी लेखन कला जागृत हो उठी है।
सारांश
मुझे शुरू से ही कहानी,कविताओं को पढ़ने,लिखने का शौक रहा है।साहित्य में रुचि हमेशा रही इसलिए बी ए में अंग्रेजी ,संस्कृत साहित्य दोनों पढ़े फिर एम ऐ, एम फिल ,पी एच डी अंग्रेजी साहित्य में करी। यू पी एच् ई एस सी से चयनित हो कुछ वर्ष अंग्रेजी साहित्य की प्रवक्ता रही पर पारिवारिक मजबूरियों के चलते त्यागपत्र दे दिया।जब से प्रतिलिपि से जुड़ी हूं, पुरानी लेखन कला जागृत हो उठी है।
बहुत सुन्दर कहानी लिखी है आपने। सचमुच प्रेम केवल पत्नी या प्रेमिका का ही नहीं अपितु माता और बहन का भी होता है। अक्सर प्रेम कहानी लिखते समय हमें प्रेम का एक ही रूप दिखता है। आपने सही तरह से प्रेम कहानी लिखी है। वास्तव में यह कहानी टाप टेन की हकदार है। पर अक्सर गहरी बात निर्णायक भी नहीं समझ पाते। तो अच्छी कहानी भी यथोचित सम्मान नहीं पाती।
एक सोरी और। पता नहीं कैसे आपकी कहानी पढने से रह गयी। आज पढी है। हो सकता है कि कुछ व्यस्तता रही हो उस दिन।
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आधुनिक समय की सच्चाई को आपने अपनी कहानी का विषय चुना है! माता पिता के प्रेम और स्नेह की बात ही निराली होती है किंतु लोग एक नए रिश्ते में जुड़ने के बाद जीवन में अक्सर अपने माता पिता के महत्व और ममतामयी प्रेम को भूल जाते हैं! जो कि बहुत ही गलत बात है! अनूप और उसकी माता सीमा के समयअनुसार बदलते भावों को बहुत ही सुन्दर तरीके से चित्रण किया है आपने इस कहानी में!
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अरे बाप रे संगीता जी आपने कितनी गंभीर कहानी लिखी बहुत सुंदर यथार्थ परक दुनिया में यह सब कुछ बिल्कुल आम हो गया है बहुत बढ़िया लिखा आपने दमदार धन्यवाद नमस्कार।
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बहुत सुन्दर कहानी लिखी है आपने। सचमुच प्रेम केवल पत्नी या प्रेमिका का ही नहीं अपितु माता और बहन का भी होता है। अक्सर प्रेम कहानी लिखते समय हमें प्रेम का एक ही रूप दिखता है। आपने सही तरह से प्रेम कहानी लिखी है। वास्तव में यह कहानी टाप टेन की हकदार है। पर अक्सर गहरी बात निर्णायक भी नहीं समझ पाते। तो अच्छी कहानी भी यथोचित सम्मान नहीं पाती।
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अरे बाप रे संगीता जी आपने कितनी गंभीर कहानी लिखी बहुत सुंदर यथार्थ परक दुनिया में यह सब कुछ बिल्कुल आम हो गया है बहुत बढ़िया लिखा आपने दमदार धन्यवाद नमस्कार।
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