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बेदर्द प्यार

4.8
775

सीमा की खुशी का ठिकाना नहीं था जब से सुना था उसके बेटे अनूप को दिल्ली ,आई आई टी में एम टेक में अड्मिशन मिल गया था।पूरे मोहल्ले में मिठाई बंटवा दी थी,कथा भी करवा दी थी घर में,ख़ुशी से फूली न समाती ...

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लेखक के बारे में
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Sangeeta Agarwal

मुझे शुरू से ही कहानी,कविताओं को पढ़ने,लिखने का शौक रहा है।साहित्य में रुचि हमेशा रही इसलिए बी ए में अंग्रेजी ,संस्कृत साहित्य दोनों पढ़े फिर एम ऐ, एम फिल ,पी एच डी अंग्रेजी साहित्य में करी। यू पी एच् ई एस सी से चयनित हो कुछ वर्ष अंग्रेजी साहित्य की प्रवक्ता रही पर पारिवारिक मजबूरियों के चलते त्यागपत्र दे दिया।जब से प्रतिलिपि से जुड़ी हूं, पुरानी लेखन कला जागृत हो उठी है।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    17 नवम्बर 2020
    बहुत सुन्दर कहानी लिखी है आपने। सचमुच प्रेम केवल पत्नी या प्रेमिका का ही नहीं अपितु माता और बहन का भी होता है। अक्सर प्रेम कहानी लिखते समय हमें प्रेम का एक ही रूप दिखता है। आपने सही तरह से प्रेम कहानी लिखी है। वास्तव में यह कहानी टाप टेन की हकदार है। पर अक्सर गहरी बात निर्णायक भी नहीं समझ पाते। तो अच्छी कहानी भी यथोचित सम्मान नहीं पाती। एक सोरी और। पता नहीं कैसे आपकी कहानी पढने से रह गयी। आज पढी है। हो सकता है कि कुछ व्यस्तता रही हो उस दिन।
  • author
    26 मई 2021
    आधुनिक समय की सच्चाई को आपने अपनी कहानी का विषय चुना है! माता पिता के प्रेम और स्नेह की बात ही निराली होती है किंतु लोग एक नए रिश्ते में जुड़ने के बाद जीवन में अक्सर अपने माता पिता के महत्व और ममतामयी प्रेम को भूल जाते हैं! जो कि बहुत ही गलत बात है! अनूप और उसकी माता सीमा के समयअनुसार बदलते भावों को बहुत ही सुन्दर तरीके से चित्रण किया है आपने इस कहानी में!
  • author
    आशा रानी शरण
    13 नवम्बर 2020
    अरे बाप रे संगीता जी आपने कितनी गंभीर कहानी लिखी बहुत सुंदर यथार्थ परक दुनिया में यह सब कुछ बिल्कुल आम हो गया है बहुत बढ़िया लिखा आपने दमदार धन्यवाद नमस्कार।
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    17 नवम्बर 2020
    बहुत सुन्दर कहानी लिखी है आपने। सचमुच प्रेम केवल पत्नी या प्रेमिका का ही नहीं अपितु माता और बहन का भी होता है। अक्सर प्रेम कहानी लिखते समय हमें प्रेम का एक ही रूप दिखता है। आपने सही तरह से प्रेम कहानी लिखी है। वास्तव में यह कहानी टाप टेन की हकदार है। पर अक्सर गहरी बात निर्णायक भी नहीं समझ पाते। तो अच्छी कहानी भी यथोचित सम्मान नहीं पाती। एक सोरी और। पता नहीं कैसे आपकी कहानी पढने से रह गयी। आज पढी है। हो सकता है कि कुछ व्यस्तता रही हो उस दिन।
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    26 मई 2021
    आधुनिक समय की सच्चाई को आपने अपनी कहानी का विषय चुना है! माता पिता के प्रेम और स्नेह की बात ही निराली होती है किंतु लोग एक नए रिश्ते में जुड़ने के बाद जीवन में अक्सर अपने माता पिता के महत्व और ममतामयी प्रेम को भूल जाते हैं! जो कि बहुत ही गलत बात है! अनूप और उसकी माता सीमा के समयअनुसार बदलते भावों को बहुत ही सुन्दर तरीके से चित्रण किया है आपने इस कहानी में!
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    आशा रानी शरण
    13 नवम्बर 2020
    अरे बाप रे संगीता जी आपने कितनी गंभीर कहानी लिखी बहुत सुंदर यथार्थ परक दुनिया में यह सब कुछ बिल्कुल आम हो गया है बहुत बढ़िया लिखा आपने दमदार धन्यवाद नमस्कार।