बेबस औरत है वो सह लेती है पर कहती नही अपने जज्बातों को वो तितली बन कर उड़ना पसंद करती है पर उड़ नही पाती बंध जाती है वो बेटी से बंटबारे मे और बन जाती है बहू होने के कायदे भूल जाती है अपनी पसंद ...
रचना तो बहुत ही सुंदर है,
भाव भी सुंदर है,
किन्तु व्याकरण ठीक नही है,
sentence कहाँ शुरू हो रहे हैं कहाँ खत्म पता नही चलता है,
बुरा मत मानियेगा
मुझे जो लगा वो लिख दिया,
यदि असभ्य लगूँ तो क्षमा
रिपोर्ट की समस्या
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