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बेबस औरत कि कहानी...

4.6
40

बेबस औरत है वो सह लेती है पर कहती नही अपने जज्बातों को वो तितली बन कर उड़ना पसंद करती है पर उड़ नही पाती बंध जाती है वो बेटी से बंटबारे मे और बन जाती है बहू होने के कायदे भूल जाती है अपनी पसंद ...

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लेखक के बारे में
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गुम नाम

अब अपने बारे में क्या बताऊं दोस्तो, जो तुम समझो तो गहरे जज़्बात हू मैं जो ना समझो तो कोरे अल्फ़ाज़ हूं मैं अगर कुछ ना समझे तो गुमनाम हूं मै

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    16 फ़रवरी 2022
    रचना तो बहुत ही सुंदर है, भाव भी सुंदर है, किन्तु व्याकरण ठीक नही है, sentence कहाँ शुरू हो रहे हैं कहाँ खत्म पता नही चलता है, बुरा मत मानियेगा मुझे जो लगा वो लिख दिया, यदि असभ्य लगूँ तो क्षमा
  • author
    Neha Naik
    16 फ़रवरी 2022
    सटीक रचना! सुंदर प्रस्तुति 👏👏🙏
  • author
    दिव्या अरोड़ा
    22 अगस्त 2022
    vry nyc
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    16 फ़रवरी 2022
    रचना तो बहुत ही सुंदर है, भाव भी सुंदर है, किन्तु व्याकरण ठीक नही है, sentence कहाँ शुरू हो रहे हैं कहाँ खत्म पता नही चलता है, बुरा मत मानियेगा मुझे जो लगा वो लिख दिया, यदि असभ्य लगूँ तो क्षमा
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    Neha Naik
    16 फ़रवरी 2022
    सटीक रचना! सुंदर प्रस्तुति 👏👏🙏
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    दिव्या अरोड़ा
    22 अगस्त 2022
    vry nyc