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बस्ते का बोझ

4.7
1520

बस्ते का बोझ राजीव आनंद चार साल का गोलू मेरा नाम रखा है ओज पढ़ने जाता सूबह-सूबह लेकर भारी बस्ता का बोझ दब गयी है कहीं ओज की मासूमियत बस्ते के बोझ तले पढ़ाई, पढ़ाई और पढ़ाई का तनाव ओज क्या करे चाह के ...

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लेखक के बारे में
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राजीव आनंद
समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    अरविन्द सिन्हा
    21 अगस्त 2022
    बस्ते की बोझ कम करने तथा भारतीय शिक्षा पद्धति के विद्यालयों में पढ़ाने को प्रेरित करती सुन्दर रचना । साधुवाद
  • author
    रश्मि सिन्हा
    04 जनवरी 2019
    बहुत अच्छी👌👌 ये एक कविता है☺️ अच्छे तुकांत शब्द भी है, पर लिखा गद्य स्टाइल में है, जो खटक रहा है, संदेशपरक👏👏
  • author
    Royal Infraline
    07 अप्रैल 2020
    ultimate
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    अरविन्द सिन्हा
    21 अगस्त 2022
    बस्ते की बोझ कम करने तथा भारतीय शिक्षा पद्धति के विद्यालयों में पढ़ाने को प्रेरित करती सुन्दर रचना । साधुवाद
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    रश्मि सिन्हा
    04 जनवरी 2019
    बहुत अच्छी👌👌 ये एक कविता है☺️ अच्छे तुकांत शब्द भी है, पर लिखा गद्य स्टाइल में है, जो खटक रहा है, संदेशपरक👏👏
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    Royal Infraline
    07 अप्रैल 2020
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