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बसेरा मेरे नाना का

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मैं बहुत जाता था अपने नाना के घर लेकिन शायद अब नही जा पाऊँगा वहाँ क्योंकि नाना खुद ही चल दिये हम सब का दामन छोड़ कर अपने घर उस घर जहाँ जाने के लिए ही आते हैं लोग इस बसेरे में कल ही सबेरे तो गये हैं ...

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लेखक के बारे में
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पंकज तिवारी

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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Dipa sahu "Prakriti"
    06 जून 2022
    waah
  • author
    Satyendra Kumar Upadhyay
    22 अक्टूबर 2015
    सुन्दर ।
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    Dipa sahu "Prakriti"
    06 जून 2022
    waah
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    Satyendra Kumar Upadhyay
    22 अक्टूबर 2015
    सुन्दर ।