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बस तुम तक

4.2
38953

आज पक्का चले जाओगे, मेरे रोकने से नहीं रुकोगे ? उसका हाथ अभी भी मेरे हाथों में था | इतना कहते-कहते उसकी आंखों में भर आयी | जब तक मैं उसे रोक पाता तब तक उसकी मासूमियत उसके गालों से टपक चुकी थी | ...

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लेखक के बारे में
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सूरज अहलादे

मुझे इतना प्यार और स्नेह देने के लिए धन्यवाद !

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Hemlata Kaurav
    18 जून 2020
    aree 3 year ho gaye ...kam se kam itna to bata dijiye ,aage wait kre ya nahi..ye kya majaak h ..kai storirs aisi h pratilipi me jo complete nahi h...
  • author
    srishti
    19 जुलाई 2018
    आगे की कहानी पूरी करिये
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    Hemlata Kaurav
    18 जून 2020
    aree 3 year ho gaye ...kam se kam itna to bata dijiye ,aage wait kre ya nahi..ye kya majaak h ..kai storirs aisi h pratilipi me jo complete nahi h...
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    srishti
    19 जुलाई 2018
    आगे की कहानी पूरी करिये