"अरे मोनुआ, जल्दी जाओ बत्ती सब बंटा जायेगा नै तो!" मोनू की माँ ने दरवाज़े की ओट से आवाज़ लगाई, पर मोनू मोहल्ले के बच्चों के साथ लट्टू घुमाता रहा। अचानक उसके सर के पीछे चट से एक तमाचा पड़ा, घूमा तो ...
मैं कुछ भी लिखता हूँ...
एक सुकून शब्दों में पाता हूँ..
हर्फ़ों के दरम्यान खुद को भुलाता हूँ...
मैं यादों की स्याही में कलम डुबो कर...
खुद को लिखता हूँ और उसे पढता हूँ..
मैं कुछ भी लिखता हूँ!!
सारांश
मैं कुछ भी लिखता हूँ...
एक सुकून शब्दों में पाता हूँ..
हर्फ़ों के दरम्यान खुद को भुलाता हूँ...
मैं यादों की स्याही में कलम डुबो कर...
खुद को लिखता हूँ और उसे पढता हूँ..
मैं कुछ भी लिखता हूँ!!
थोड़ी ही देर में साहेब गुम हो गया और मोनू के पाँव चलने लगे....
क्या सुंदर चित्रण किया है वाह
ऐसा लग रहा है जैसे कोई लघु फिल्म आँखों के सामने चल रही हो।
बधाई आपको
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थोड़ी ही देर में साहेब गुम हो गया और मोनू के पाँव चलने लगे....
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