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बख्शीस

4.1
6913

पर सोनाली के मन मे कुछ और ही चल रहा था कि यह कैसी बख्सीस है, जिसे पाकर वह खुश नहीं है, देने वाला भी खुश नही है, लेकिन उसकी माँ खुशी से फूली नहीं समा रही हैं। और सोनाली मन ही मन फुसफुसाई - '' यह ...

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लेखक के बारे में
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ऋषभ शुक्ला

मैं एक छाया चित्रकार, यात्री और चिट्ठा लेखक हूँ| मुख्य रूप से मुझे लिखना-पढ़ना, घूमना-फिरना और विभिन्न चीजों को कैमरे मे कैद करना पसंद है| मुझे कुछ नया करना पसंद है| हिन्दी कविता मंच - https://hindikavitamanch.blogspot.com/ मेरे मन की - https://meremankee.blogspot.com/ घुमक्कड़ी दिल से - https://theshuklajee.blogspot.com/ यूट्यूब - https://www.youtube.com/channel/MereManKee फेसबुक - https://www.facebook.com/theshuklaji/ इंस्टाग्राम - https://instagram.com/theshuklajee/ ट्विटर - https://twitter.com/theshuklajee/ संपर्क करें - [email protected]

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Shivam Shukla
    25 नवम्बर 2019
    बहुत सुन्दर रचना
  • author
    Goswami Rajat Bharti
    08 मई 2020
    बहुत सुंदर सर! mne bhi apni pehli kahani हमसफ़र likhi h agar aap pdh kar review dengey to or achha likh paunga .
  • author
    vinay gupta
    08 मार्च 2020
    Zamindar and Zamindarni both are gone.. Raja ka beta ab Raja nahi banta hai. Raja wahi banta hai jisme merit hota hai...
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    Shivam Shukla
    25 नवम्बर 2019
    बहुत सुन्दर रचना
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    Goswami Rajat Bharti
    08 मई 2020
    बहुत सुंदर सर! mne bhi apni pehli kahani हमसफ़र likhi h agar aap pdh kar review dengey to or achha likh paunga .
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    vinay gupta
    08 मार्च 2020
    Zamindar and Zamindarni both are gone.. Raja ka beta ab Raja nahi banta hai. Raja wahi banta hai jisme merit hota hai...