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बाझन का पुत्र मोह

3.4
46

बानी तुम ये क्या कर रही हो? छोड़ो इसे रो रहा है... अरे अरे क्यों ऐसा कर रहीं हो। सूर्या मेरा भी तो बेटा हैं तुमने ही तो इसे मेरी गोद में डाला था.. अब क्या हुआ ऐसा क्यों कर रही हो.. सुमन सूर्या को ...

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लेखक के बारे में

प्रेम एक भावनगत विषय हैँ भावना से हि इसका पोषण है भावना से हि जीवित हैँ और भावना से ही विलुप्त होता हैं मन के भाव ही काव्य हैँ,और काव्य शब्दों का समूह हैँ यह भौतिक वस्तु नहीं हैँ, मन के भाव ही काव्य हैँ और काव्य ही मन के भाव हैँ

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    NARENDRA Jain
    25 जुलाई 2022
    kahaani adhuri hai...isiliye ki banni aur ritesh ka kya Hua....kya unlog ne maafi maangi....plz aisi kahaani naa likhe
  • author
    pallavi mishra
    25 जुलाई 2022
    bahut sundar rachna
  • author
    Renu Gupta "Renu"
    25 जुलाई 2022
    improve kariy
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  • author
    NARENDRA Jain
    25 जुलाई 2022
    kahaani adhuri hai...isiliye ki banni aur ritesh ka kya Hua....kya unlog ne maafi maangi....plz aisi kahaani naa likhe
  • author
    pallavi mishra
    25 जुलाई 2022
    bahut sundar rachna
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    Renu Gupta "Renu"
    25 जुलाई 2022
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