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बाईस साल बाद

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क्या अब भी झिलमिलाती होंगी तुम्हारी दंत -पंक्तियाँ ? और अब भी सिंकी पावरोटी का कोई काला बिंदुनुमा टुकड़ा बनाता होगा उन पर ब्यूटी स्पॉट बाईस साल पहले कभी -कभार बनाता था जिस तरह ? यकीन मानो जज्ब कर लेता ...

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लेखक के बारे में
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संजीव ठाकुर
समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    prabhat ranjan
    28 जुलाई 2022
    बहुत प्यारी रचना, सचमुच सराहनीय है
  • author
    कुमार अभिनंदन
    09 जनवरी 2019
    अहा..यादें..।
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    prabhat ranjan
    28 जुलाई 2022
    बहुत प्यारी रचना, सचमुच सराहनीय है
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    कुमार अभिनंदन
    09 जनवरी 2019
    अहा..यादें..।