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बहुत सही ग़म-ए-गेती शराब कम क्या है

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बहुत सही ग़म-ए-गेती शराब कम क्या है ग़ुलाम-ए-साक़ी-ए-कौसर हूँ मुझको ग़म क्या है तुम्हारी तर्ज़-ओ-रविश जानते हैं हम क्या है रक़ीब पर है अगर लुत्फ़ तो सितम क्या है सुख़न में ख़ामा-ए-ग़ालिब की ...

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लेखक के बारे में

मूल नाम : मिर्ज़ा असदउल्ला बेग़ ख़ान ग़ालिब जन्म : 27 दिसंबर 1796, आगरा (उत्तर प्रदेश) भाषा : उर्दू, फ़ारसी विधाएँ : गद्य, पद्य निधन - 15 फरवरी 1869, दिल्ली

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    AnshuPriya Agrawal
    05 मार्च 2020
    🙏🙏 बहुत ही अच्छी लेखनी काबिले तारीफ बहुत ही उम्दा💐🙏बहुत गहरी बातें छुपी हैं, चंद शब्दों में, भाव से भरी पंक्तियों में बहुत ख़ूबसूरत पंक्तियां। अशेष शुभकामनाएं आपको 👌👌🙏💐 उत्साहित और बधाई देने के लिये शब्दों की कमी महसूस कर रहा हूँ ..... बहुत बढ़िया अपनी लेखनी से संपूर्ण वसुधा को सुभाषित करते रहिए बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें
  • author
    विनीता मिश्रा
    25 अक्टूबर 2019
    लाजवाब🙏🙏
  • author
    Kunal ranjan Singh
    16 जून 2018
    amazing collection !
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    AnshuPriya Agrawal
    05 मार्च 2020
    🙏🙏 बहुत ही अच्छी लेखनी काबिले तारीफ बहुत ही उम्दा💐🙏बहुत गहरी बातें छुपी हैं, चंद शब्दों में, भाव से भरी पंक्तियों में बहुत ख़ूबसूरत पंक्तियां। अशेष शुभकामनाएं आपको 👌👌🙏💐 उत्साहित और बधाई देने के लिये शब्दों की कमी महसूस कर रहा हूँ ..... बहुत बढ़िया अपनी लेखनी से संपूर्ण वसुधा को सुभाषित करते रहिए बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें
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    विनीता मिश्रा
    25 अक्टूबर 2019
    लाजवाब🙏🙏
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    Kunal ranjan Singh
    16 जून 2018
    amazing collection !