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बहु, बाथरूम में क्या सो रही ?

4.4
11862

ब्याह के जब मै घर आई अगले दिन, सासु माँ, ये बोल उठीं बरसों से, जैसे तनहा थीं , मेरे आगे पीछे, डोल उठीं ब्याह गयी है, तू इस घर में, इस घर का नाम, सिखा दूँ मै घर में तो क्या सीखा होगा, आजा तुझको काम ...

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लेखक के बारे में
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नेहा रस्तोगी
समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    शोभा शर्मा
    10 अक्टूबर 2018
    बहू तो बड़ी ही घाघ निकली ,सासु माँ की भी सास निकली ,समय पर कोई बस ही नहीं है कर्मठ नहीं चालाक ही निकली .
  • author
    Neelima Sharma Nivia "निविया"
    26 अक्टूबर 2015
    व्हाट्स अप्प पर यह कविता वायरल हो चुकी हैं .मुझे नही मालूम था यह आपकी लिखी कविता हैं :) मजा आया पढ़कर 
  • author
    नवनीत सिंह
    21 मार्च 2016
    बहुत ही उम्दा रचना 
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    शोभा शर्मा
    10 अक्टूबर 2018
    बहू तो बड़ी ही घाघ निकली ,सासु माँ की भी सास निकली ,समय पर कोई बस ही नहीं है कर्मठ नहीं चालाक ही निकली .
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    Neelima Sharma Nivia "निविया"
    26 अक्टूबर 2015
    व्हाट्स अप्प पर यह कविता वायरल हो चुकी हैं .मुझे नही मालूम था यह आपकी लिखी कविता हैं :) मजा आया पढ़कर 
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    नवनीत सिंह
    21 मार्च 2016
    बहुत ही उम्दा रचना