pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

मोहपाश-2 बदलाव संजोने हैं क्या..?

4.1
3418

सुबह उठकर मोबाइल आन किया तो टन्न ...टन्न.... की आवाज के साथ अनेक संदेश इन बाक्स में टपक पडें ...गोया पूरी रात गंतब्य तक पहुंचने की आस में मोबाइल के आसपास ही मंडरा रहे हों । मैने पाया कि थोडी ही ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में

नेह पत्र की आस लगाये अब तो एक ज़माना बीता..!

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    27 फ़रवरी 2019
    काव्य गंगा विश्व स्तरीय मोबाइल एप्स की प्राथमिकता तैयारियां पूर्ण हो गयी है। काव्य गंगा में वित्तीय संकट है आप हमारे संरक्षक सदस्य बनकर काव्य गंगा को प्रवाहित कर सकते है। आप अपना विजिटिंग कार्ड फोटो और मात्र 1100/ भेज कर अजीवन संरक्षक सदस्य बन सकते है।। संरक्षक शुल्क यहां पर भेजे। * विजय कुमार मिश्र- एसबीआई खाता 11507804347 आईएफसी SBIN0004806 काल प्लीज 6260201191
  • author
    भरत पाण्डेय
    20 मई 2017
    काश कि हमारे जीवन से अच्छे अनुभव सेव हो जाएं और कड़वे अनुभव हमारी जिन्दगी से डिलीट हो जाएं........लेकिन जीवन वह है जिसमे कुछ खट्टी कुछ मीठी यादें हों , हम एक दूसरे के सुख दुःख में शामिल हों , क्योकि "जीवन चलने का नाम चलते रहो सुबह-ओ -शाम"
  • author
    कहानी Café
    05 जून 2017
    बहुत अच्छा लगा पढ़ कर। नास्टैल्जिया और पुराने रिश्तों की कहानियां मुझे बहुत पसंद आती हैं और आपके लिखने की शैली भी अपने जैसी लगी। फ़ुरसत मिले तो पढियेगा मेरी कोई कहानी।
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    27 फ़रवरी 2019
    काव्य गंगा विश्व स्तरीय मोबाइल एप्स की प्राथमिकता तैयारियां पूर्ण हो गयी है। काव्य गंगा में वित्तीय संकट है आप हमारे संरक्षक सदस्य बनकर काव्य गंगा को प्रवाहित कर सकते है। आप अपना विजिटिंग कार्ड फोटो और मात्र 1100/ भेज कर अजीवन संरक्षक सदस्य बन सकते है।। संरक्षक शुल्क यहां पर भेजे। * विजय कुमार मिश्र- एसबीआई खाता 11507804347 आईएफसी SBIN0004806 काल प्लीज 6260201191
  • author
    भरत पाण्डेय
    20 मई 2017
    काश कि हमारे जीवन से अच्छे अनुभव सेव हो जाएं और कड़वे अनुभव हमारी जिन्दगी से डिलीट हो जाएं........लेकिन जीवन वह है जिसमे कुछ खट्टी कुछ मीठी यादें हों , हम एक दूसरे के सुख दुःख में शामिल हों , क्योकि "जीवन चलने का नाम चलते रहो सुबह-ओ -शाम"
  • author
    कहानी Café
    05 जून 2017
    बहुत अच्छा लगा पढ़ कर। नास्टैल्जिया और पुराने रिश्तों की कहानियां मुझे बहुत पसंद आती हैं और आपके लिखने की शैली भी अपने जैसी लगी। फ़ुरसत मिले तो पढियेगा मेरी कोई कहानी।