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बड़े पेड़ के भीतर छोटा पेड़

4.0
12540

“आज से ठीक 360 दिन बचे है|” एक दिन बड़े साहब ने सरकारी कुर्सी के हत्थे परहथेली फेरते हुए कहा था |फिर वे सिर कुर्सी पर टिका कर दीवार पर लगे केलेंडरकी तरफ देखने लगे |उन्हें लगने लगा जैसे तारीखें बहुत ...

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लेखक के बारे में
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माधव राठौड़
समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Swati Saini
    23 ऑक्टोबर 2018
    Nice
  • author
    Sonia Pratibha Tani
    23 ऑक्टोबर 2018
    nice
  • author
    Sandhya Shukla
    15 सप्टेंबर 2018
    बढ़िया लेखन
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  • author
    Swati Saini
    23 ऑक्टोबर 2018
    Nice
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    Sonia Pratibha Tani
    23 ऑक्टोबर 2018
    nice
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    Sandhya Shukla
    15 सप्टेंबर 2018
    बढ़िया लेखन