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बैक अप फ्रेंड

4.6
9865

आज सुबह सवेरे ही मनीषा के हाँथ बड़ी तेजी से काम कर रहे थे। वैसे भी उसके काम करने की गति काफी तेज थी लेकिन आज तो उसके हाँथ अतिरिक्त उर्जा से भरे हुए थे। वह सुबह उठ भी अन्य दिनों की अपेक्षा जल्दि ...

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समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    29 अप्रैल 2017
    अजी वाह भई वाह !! एकदम नया कांसेप्ट ले आई आप बैक अप फ्रेंड . हाहा एकदम दिल को भा गया धन्यवाद इतनी सुन्दर रचना के लिए और एकदम सही बात हम सभी के जीवन के लम्बे बोझिल सफर में हर मुकाम पर कहीं ना कहीं एक बैक अप फ्रेंड की जरूरत है . आपको सादर साधुवाद
  • author
    Yogendra Singh
    18 सितम्बर 2018
    अच्छी है। हल्की फुल्की सादगी से भरपूर कथा लिखने के लिए बधाई। लेकिन ऐसे फ्रेन्ड कम ही मिलते हैं।
  • author
    Rajneesh Kumar
    04 मार्च 2017
    बहुत ही प्यारी स्टोरी है । जो दिल को छु कर निकल गयी है ।सच में स्टोरी तो ऐसी ही होनी चाइए।।
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    29 अप्रैल 2017
    अजी वाह भई वाह !! एकदम नया कांसेप्ट ले आई आप बैक अप फ्रेंड . हाहा एकदम दिल को भा गया धन्यवाद इतनी सुन्दर रचना के लिए और एकदम सही बात हम सभी के जीवन के लम्बे बोझिल सफर में हर मुकाम पर कहीं ना कहीं एक बैक अप फ्रेंड की जरूरत है . आपको सादर साधुवाद
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    Yogendra Singh
    18 सितम्बर 2018
    अच्छी है। हल्की फुल्की सादगी से भरपूर कथा लिखने के लिए बधाई। लेकिन ऐसे फ्रेन्ड कम ही मिलते हैं।
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    Rajneesh Kumar
    04 मार्च 2017
    बहुत ही प्यारी स्टोरी है । जो दिल को छु कर निकल गयी है ।सच में स्टोरी तो ऐसी ही होनी चाइए।।