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बचपन

4.0
943

एक बार फिर से , बचपन जीना चाहती हूँ , अल्लड , मतवाली , हिरणी बन , कुलाचे भरना , बाबुल के कंधे पर चढ़ , बागों में घूमना चाहती हूँ एक बार फिर से , बचपन जीना चाहती हूँ , छोटी - छोटी बातों पर , रोना ...

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लेखक के बारे में

 शिक्षा --- बी ए पांडुलिपि प्रकाशन --- एम. डी . विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं में कई कवितायें प्रकाशित   साझा कविता संग्रह 'कविता अनवरत -2 ' (अयन प्रकाशन ) में कवितायें प्रकाशित

समीक्षा
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  • author
    Satyendra Kumar Upadhyay
    19 अक्टूबर 2015
    अल्लड , ग़मो जैसे शब्द ही प्रशंसा हेतु पर्याप्त हैं । राष्ट्र भाषा का अपमान करती एक अत्यंत सारहीन अप्रासंगिक कविता है। राष्ट्र भाषा का अल्प ज्ञान दर्शाती है ।
  • author
    24 अक्टूबर 2023
    अत्यंत मार्मिक, आप मेरी रचनाएँ भी पढ़कर अपने अमूल्य सुझाव दे।🙏🌺
  • author
    29 जून 2018
    भावनाओं से ओतप्रोत कविता । हार्दिक बधाई शुभकामनाएँ आपको ।
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    Satyendra Kumar Upadhyay
    19 अक्टूबर 2015
    अल्लड , ग़मो जैसे शब्द ही प्रशंसा हेतु पर्याप्त हैं । राष्ट्र भाषा का अपमान करती एक अत्यंत सारहीन अप्रासंगिक कविता है। राष्ट्र भाषा का अल्प ज्ञान दर्शाती है ।
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    24 अक्टूबर 2023
    अत्यंत मार्मिक, आप मेरी रचनाएँ भी पढ़कर अपने अमूल्य सुझाव दे।🙏🌺
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    29 जून 2018
    भावनाओं से ओतप्रोत कविता । हार्दिक बधाई शुभकामनाएँ आपको ।