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बचपन

4.6
707

मिटटी के टीलो सा था वो बचपन...... जहाँ हजारो सपनों के महल बनते और बिखरते थे...... जहाँ हर रोज एक नया सपना आँखो में लिये चलते थे हम.... जहाँ दोस्तो और अपनो से घिरी रहती थी जिन्दगी....... जहाँ बडो के...

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लेखक के बारे में

नाम- अंजली अग्रवाल पिता- स्व. श्री मोतीराम अग्रवाल माता- श्रीमति मिथलेश देवी अग्रवाल परिवार - 9 बहन, 1 भार्इ  जन्म- 25-05-1990 शिक्षा - एम. काम विधा - कविता और लेख  प्रकाशन - रचानाकार , स्वर्गविभा प्रेरणा दायक - परिवार सम्र्पक - अंजली अग्रवाल वार्ड न. 12 बाजार मोहल्ला परासिया 480441 जिला - छिन्दवाडा़ म.प्र.  

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    रमेश पाली
    30 अगस्त 2018
    बहुत सुंदर
  • author
    हेमंत मोढ़ "Happy-Mentor"
    27 मई 2019
    बचपन के दिन भी क्या दिन थे, आपने याद दिला दिए, धन्यवाद, बधाई, शुभकामनाएं ! आपके लेखन में सहजता, सरलता हैं। कृपया "प्यार का एहसास" पढ़िएगा...
  • author
    12 दिसम्बर 2020
    Bachpan ki yaad aa rahi . Sach aap ki ye line emotional kar di 😔😚😚
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    रमेश पाली
    30 अगस्त 2018
    बहुत सुंदर
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    हेमंत मोढ़ "Happy-Mentor"
    27 मई 2019
    बचपन के दिन भी क्या दिन थे, आपने याद दिला दिए, धन्यवाद, बधाई, शुभकामनाएं ! आपके लेखन में सहजता, सरलता हैं। कृपया "प्यार का एहसास" पढ़िएगा...
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    12 दिसम्बर 2020
    Bachpan ki yaad aa rahi . Sach aap ki ye line emotional kar di 😔😚😚