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बातें - मन की चाभी

4.4
489

बात वो कहो जो मन का चमन ही संवार दे दिल में लगे फूल खिले एक नयी बहार दे बात यूं कहो हो जैसी हो सुबह की ताज़गी मीठी जैसी मिश्री हो और हो जो बिलकुल लाज़मी बात सबके हित में हो और भाव मीठा शांत हो जिससे ...

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लेखक के बारे में
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नेहा रस्तोगी
समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    विनीता मिश्रा
    29 अक्टूबर 2019
    बहुत सुंदर
  • author
    N. Rajput
    02 अगस्त 2019
    👍
  • author
    Yogendra Maurya
    12 जनवरी 2017
    बहुत सुंदर
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    विनीता मिश्रा
    29 अक्टूबर 2019
    बहुत सुंदर
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    N. Rajput
    02 अगस्त 2019
    👍
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    Yogendra Maurya
    12 जनवरी 2017
    बहुत सुंदर