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बांझ

4.7
116526

चौदह साल की उम्र में जब खेलने कूदने की उम्र होती है तब रिश्ता हो गया.. उस समय मे सभी की लड़कियाँ बारह तेरह वर्ष मै ही व्याह दी जाती थी, शादी का मतलब भी पता नहीं होता था बस ये सोचकर खुश होते थे ...

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लेखक के बारे में
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Rashmi Srivastava

Follow me on Instagram my I'd - rashmikas.story मैं पढ़ने का शौक रखती हूं और इसी शौक ने मुझे लेखक बना दिया जो कुछ भी अपने आस पास देखती हूँ उससे सीखने की कोशिश करती हूँ और पन्नों पर उकेर देती हूं । मेरे कुछ धारावाहिक 1-साध्वी का प्रेम 2-साध्वी का प्रेम सीजन2 3-कैदी दुल्हन (N.R.I.पिया) 4-कुंवारी मां (अछूत कन्या) 5-अधूरी दुल्हन 6-बाल विवाह (बचपन में जोड़ा गया बंधन) सुपर लेखक र्थी अवार्ड विजेता । 7-श्रापित प्रेमी 8-विवाह एक अनुबंध लघुकथा 1-बांझ 2-सौतेली मां (वरदान या श्राप) 3-सरपंच के घर की दावत 4-दहेज 5-पकवान 90 के दशक के 6-राखी का नेग 7-मां का प्रेमपत्र 8-बेटी या ATM 9- स्त्री एक संघर्ष 10-दूल्हे की विदाई 11-मेरी दुल्हन 12-वो सांवली लड़की 13-केदारनाथ (एक प्रलय) 14- विभाजन (एक कथा) 15-अश्कों की उड़ान आप पढ़ते रहिए और मैं लिखती रहूं सिर्फ प्रतिलिपि पर ।

समीक्षा
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  • author
    Shailendra Gond
    15 फ़रवरी 2020
    उसमे पति को भी पत्नी का साथ देना चाहिए ये ज़रूरी तो नहीं हैं कि मा जो बोले वो सही हैं कुच्छ तो अपने दिमाग से सोचना चाहिए कि कहा गलत हो रहा है मैं ये नहीं कहता कि मां जो बोले वो ना सुनो मां मां हैं फिर भी बहुत अच्छी कहानी है इससे बहुत से लोगों को अच्छी सीख मिलेगी.
  • author
    Writer
    09 दिसम्बर 2019
    bahut hi sad story hai magar banjh hona ya na hona yeh ek nutaral chiz hai isme istri ko dosh dena galat hai.....
  • author
    Kamlesh Patni
    28 फ़रवरी 2021
    कबीर दास जी ने सही कहा है माली सीचै सौ घड़ा ऋतु आए फलदेत।हर चीज काएक समय होता है।समाज बांझ नाम की बुराई से कभी मुक्त होगा या आधुनिक होने का ढोंग चलता ही रहेगा।
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    Shailendra Gond
    15 फ़रवरी 2020
    उसमे पति को भी पत्नी का साथ देना चाहिए ये ज़रूरी तो नहीं हैं कि मा जो बोले वो सही हैं कुच्छ तो अपने दिमाग से सोचना चाहिए कि कहा गलत हो रहा है मैं ये नहीं कहता कि मां जो बोले वो ना सुनो मां मां हैं फिर भी बहुत अच्छी कहानी है इससे बहुत से लोगों को अच्छी सीख मिलेगी.
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    09 दिसम्बर 2019
    bahut hi sad story hai magar banjh hona ya na hona yeh ek nutaral chiz hai isme istri ko dosh dena galat hai.....
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    Kamlesh Patni
    28 फ़रवरी 2021
    कबीर दास जी ने सही कहा है माली सीचै सौ घड़ा ऋतु आए फलदेत।हर चीज काएक समय होता है।समाज बांझ नाम की बुराई से कभी मुक्त होगा या आधुनिक होने का ढोंग चलता ही रहेगा।