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अवगुंठन

4.8
79

इस कहानी के सभी पात्र और घटनाएं काल्पनिक है । इसका किसी भी व्यक्ति अथवा घटना से कोई संबंध नहीं है । यदि कोई समानता पाई जाती है तो यह महज संयोग होगा । अवगुंठन बहुभोज समाप्त हो चुका था ।मेहमान जहां ...

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लेखक के बारे में
author
Arun Gupta

प्रिय पाठकों, कहानियां हमें कभी गुदगुदाती है,कभी रुलाती है,कभी अपनी ही कहानी लगती है.. काल्पनिक होते हुए भी मर्म स्थल को छू जाती है। जानते हैं क्यों लगती है अपनी सी ये कहानियां क्योंकि हमारे और आपके जीवन के जद्दोजहद से उपजी है ये कहानियां..! आइए हमारे प्रतिलिपि पेज पर और मनोरंजन से भरपूर कहानियों का आनंद लिजिए...यहां आपको मानव जीवन के भिन्न-भिन्न पहलूओं को छूती हुई कहानियां मिलेगी,बस आपको जो पसंद हो वही पढ़ें और हमारा मार्गदर्शन करते रहें ..। आशा है आपका साथ हमेशा बना रहेगा ।

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Anita Rani
    08 جنوری 2023
    jb rakshak hi esa krenge to kse chalega.very sad
  • author
    खुशबू हरमुख
    03 مئی 2023
    बहुत ही मार्मिक कथा 👏👏
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    Anita Rani
    08 جنوری 2023
    jb rakshak hi esa krenge to kse chalega.very sad
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    खुशबू हरमुख
    03 مئی 2023
    बहुत ही मार्मिक कथा 👏👏