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"औरत ही क्यूँ बाँझ?"

4.5
3540

बाझँपन एक दर्द या पङताङना!

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लेखक के बारे में
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अनामिका

प्रेम और आस्था दोनों पर किसी का जोर नहीं है, ये मन जहां पर लग जाए वहीं रब नजर आता है।

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Kanchan Pareek
    01 अगस्त 2021
    रिया का रवि को दूसरी शादी करने से रोकना ओर उससे अपने लिए बोलने के लिए कहना बहुत अच्छा लगा एक औरत अपने लिए इंसाफ माग्ना अपनी पति से
  • author
    sudha tiwari
    02 अगस्त 2021
    बिलकुल सही बोली केवल औरत ही बाझ नहीं होती पुरुष भी हो सकते है
  • author
    Anitamary "Anjo"
    01 अगस्त 2021
    अच्छी कहानी थी मगर कुछ अधूरी सी लगी ।
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    Kanchan Pareek
    01 अगस्त 2021
    रिया का रवि को दूसरी शादी करने से रोकना ओर उससे अपने लिए बोलने के लिए कहना बहुत अच्छा लगा एक औरत अपने लिए इंसाफ माग्ना अपनी पति से
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    sudha tiwari
    02 अगस्त 2021
    बिलकुल सही बोली केवल औरत ही बाझ नहीं होती पुरुष भी हो सकते है
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    Anitamary "Anjo"
    01 अगस्त 2021
    अच्छी कहानी थी मगर कुछ अधूरी सी लगी ।