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शिकारी

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दशकों पूर्व की स्थितियाँ परिस्थितियाँ जानी पहचानी पुनर्जन्म सी अपने जातिगत उभार में आदिम प्रकृति का समकालीन पाठ करती हैं घात में बैठा है हर एक शिकारी कोई फर्क नहीं शिकार चाहे जानवर का हो या इन्सान ...

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लेखक के बारे में

प्रतिभा चौहान हिंदी की लेखिका हैं , इन्होंने कहानी , कविता , लेख, यात्रा वृतांत,लघुकथा,बाल साहित्य में अपनी उपस्थिति दर्ज करायी है । इनकी प्रकाशित कृतियां:- “चुप्पियों के हज़ार कंबल’(प्रकाशाधीन) “पेड़ों पर मछलियाँ" कविता संग्रह देश की विभिन्न भाषाओं में कविताओं का अनुवाद। राष्ट्रीय एवं अन्तराष्ट्रीय सेमिनार में सहभागिता ,इन्हें लक्ष्मीकान्त मिश्र राष्ट्रीय सम्मान, 2018 ,राम प्रसाद बिस्मिल सम्मान, 2018, स्वयंसिद्धा सृजन सम्मान ,2019 इत्यादि मिले हैं । प्रतिभा जी न्यायिक सेवा में न्यायाधीश हैं । इनसे [email protected] पर सम्पर्क किया जा सकता है

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Sangeeta Vishwanath
    24 मई 2021
    nice
  • author
    AnshuPriya Agrawal
    20 जुलाई 2020
    बहुत ही मार्मिक
  • author
    Devesh Barthwal
    20 जुलाई 2020
    सुन्दर रचना
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    Sangeeta Vishwanath
    24 मई 2021
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    AnshuPriya Agrawal
    20 जुलाई 2020
    बहुत ही मार्मिक
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    Devesh Barthwal
    20 जुलाई 2020
    सुन्दर रचना