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आत्मीय स्त्रोत

4.2
286

नदी का रंग बहता है घने जंगल में डालियों से मुग्ध हो एकाकार होता है जंगल झाँकने लगता है उसमे साफ़ परिदृश्य पाखी ,तितली ,हिरण अनछुई बदली छू लेती है नदी का अंतर्मन. जब नदी बर्फ हो उड़ रही थी तो भी नदी का ...

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लेखक के बारे में

नाम -श्रीमती मंजुल भटनागर . अध्यापन क्षेत्र से जुडी रही हूँ। आर्मी परिवार से हूँ ,इसी कारण देश के सभी बड़े छोटे शहर और गाँवों में रहने का मौका मिला। जहां एक ओर पंजाब की उमंग और खेत मन मोहते हैं ,वहीँ सिक्कम की कंचनजंघा से निकलती तीस्ता नदी ,और पहाड़ों की खूबसूरती मन मोह लेती है। एक तरफ कोणार्क टेम्पल और नीला स्वच्छ समुन्द्र और दूसरी ,और माया नगरी का विशाल समुन्द्र। इन सभी अनुभव को बटोर कर जो व्यक्तित्व बना उसमे पूरा हिन्दुस्तान समाया हुआ है. १. मेरी रचनाएँ लेख ,कहानी ,कवितायेँ इन पत्रिकाओं में शामिल हुए - सारथ , अभिव्यक्ति , अनुभूति , नव्या, प्रवक्ता ,उदन्ती, हाइकू कोष ,हिन्दी-पुष्प ,प्रयास आगमन ,सृजन ,कविमन,सहज साहित्य ,वृत्त मित्र, लेखनियाँ, परिकल्पना ,साहित्य रागिनी शब्द व्यंजना.अपनी रचनाओं के लिए कुछ सम्मान पत्र भी हासिल किये हैं . २. बच्चों की कहानियां और कविताएँ लिखने में भी रूचि है ,कुछ कवितायेँ बच्चों की पत्रिकाओं में प्रकाशित भी हुई हैं. ३. मेरी कुछ पुस्तकें जैसे - आधी आबादी का सच ,प्रेमाभिव्यक्ति काव्य संग्रह ,अंजुरी ,अनुगूंज ,हिंदी साहित्य के आईने में स्त्री विमर्श {निबंध संग्रह} सांझा प्रयास में छप चुकी हैं . कुछ पुस्तकें प्रकाशित होने वाली हैं . मेरी प्रिय काव्य की पंक्तियाँ हैं ----- "गहन सघन मनमोहक वन तरु, मुझको आज बुलाते हैं किन्तु किये जो वादे मैंने, याद मुझे वो आते हैं अभी कहाँ आराम मुझे ,यह मूक निमंत्रण छलना है अरे ,अभी तो मीलों मुझको , मीलों मुझको चलना"। Robert Frost translated by Harivansh Rai Bachchan. मंजुल भटनागर मुंबई दिनांक २८ अक्टूबर ०९८९२६०११०५ [email protected]

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Dolly Mishra
    05 जुलाई 2022
    पाखी, तितली, हिरण अनछुई बदली छू लेती है नदी का अन्तर्मन बेहतरीन कविता मैम
  • author
    manu sweta
    23 मार्च 2021
    bahut sundar
  • author
    Manjit Singh
    03 जुलाई 2020
    kavita shresth hai
  • author
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  • author
    Dolly Mishra
    05 जुलाई 2022
    पाखी, तितली, हिरण अनछुई बदली छू लेती है नदी का अन्तर्मन बेहतरीन कविता मैम
  • author
    manu sweta
    23 मार्च 2021
    bahut sundar
  • author
    Manjit Singh
    03 जुलाई 2020
    kavita shresth hai