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आत्महत्या….

4.3
841

वो अन्दर ही अन्दर टूटा सा… खुद की दुनिया से रूठा सा… कर कर प्रयास निरन्तर हारा… वो भी था किसी माँ का राज दुलारा… बाप का साया बच्चपन में खोया… दे आग पिता की चिता को भी ना रोया… इकलौती ग़रीब माँ का ...

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लेखक के बारे में
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धीरज झा

नाम धीरज झा, काम - स्वछंद लेखन (खास कर कहानियां लिखना), खुद की वो बुरी आदत जो सबसे अच्छी लगती है मुझे वो है चोरी करना, लोगों के अहसास को चुरा कर कहानी का रूप दे देना अच्छा लगता है मुझे....किसी का दुःख, किसी की ख़ुशी, अगर मेरी वजह से लोगों तक पहुँच जाये तो बुरा ही क्या है इसमें :) .....इसी आदत ने मुझसे एक कहानी संग्रह लिखवा दिया जिसका नाम है सीट नं 48.... जी ये वही सीट नं 48 कहानी है जिसने मुझे प्रतिलिपि पर पहचान दी... इसके तीन भाग प्रतिलिपि पर हैं और चौथा और अंतिम भाग मेरे द्वारा इसी शीर्षक के साथ लिखी गयी किताब में....आप सब की वजह से हूँ इसीलिए कोशिश करूँगा कि आप सबका साथ हमेशा बना रहे... फेसबुक पर जुड़ें :- https://www.facebook.com/profile.php?id=100030711603945

समीक्षा
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  • author
    27 ജൂണ്‍ 2018
    सशक्त रचना । हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ आपको बहुत । मेरी रचना मुक्ति पढ़ने का कष्ट कीजिएगा ।
  • author
    Praveen Rajput "Niruttar"
    26 നവംബര്‍ 2024
    sundar yatharth likha aapne
  • author
    शिवा शिव
    26 ജൂണ്‍ 2017
    Bhut sundar rachna
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    27 ജൂണ്‍ 2018
    सशक्त रचना । हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ आपको बहुत । मेरी रचना मुक्ति पढ़ने का कष्ट कीजिएगा ।
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    Praveen Rajput "Niruttar"
    26 നവംബര്‍ 2024
    sundar yatharth likha aapne
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    शिवा शिव
    26 ജൂണ്‍ 2017
    Bhut sundar rachna