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*** भूमिजा

4.7
705

दशानन! मैं सीता हूँ - भूमिजा। सहनशील हूँ परन्तु कायर नहीं, अपार शक्ति एवं ऊर्जा का भंडार हूँ मैं, चाहती तो पंचवटी में ही नष्ट कर सकती थी तुम्हें। तुम क्या सोंचते हो स्वयंबर में जिस शिव धनुष को ...

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लेखक के बारे में
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Beena Awasthi

मैं रक्षा मंत्रालय से राजपत्रित अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हूॅ। लिखना और पढना मुझे आत्मसंतुष्टि देता है। वैसे तो लेखन बहुत पहले प्रारम्भ कर दिया था लेकिन संयुक्त परिवार की पारिवारिक जिम्मेदारियों, लम्बे कार्य के घंटे, बच्चे के दायित्व ने लेखन को बाधित करते रहे। प्रतिलिपि के माध्यम से अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का अवसर मिला है और साथ ही आप सभी दोस्तों से मिलने का सौभाग्य।

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    19 दिसम्बर 2019
    बहुत बढ़िया रचना, सीता की नजर से। हमारी लघुकथाएं भी पढ़िए। निगरानी संस्कार और असली हकदार।
  • author
    Bandana Singh
    03 जून 2020
    बहुत ही उम्दा भाव /बहुत ही सुंदर काव्य तत्व ।👌👌👌👌
  • author
    Arti Agrawal "The writer"
    15 जून 2021
    भूमिजा सीता का एक नया दृष्टिकोण बहुत ही रुचिकर लगा और सार्थक भी। स्त्री - संबंधी विषयों में रुचि होने के कारण मेरे अनुसार यह एक सुंदर रचना है।लेखिका को मेरी तरफ से बहुत-बहुत बधाई। कृपया मेरी रचनाओं को भी प्रोत्साहन दें।
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    19 दिसम्बर 2019
    बहुत बढ़िया रचना, सीता की नजर से। हमारी लघुकथाएं भी पढ़िए। निगरानी संस्कार और असली हकदार।
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    Bandana Singh
    03 जून 2020
    बहुत ही उम्दा भाव /बहुत ही सुंदर काव्य तत्व ।👌👌👌👌
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    Arti Agrawal "The writer"
    15 जून 2021
    भूमिजा सीता का एक नया दृष्टिकोण बहुत ही रुचिकर लगा और सार्थक भी। स्त्री - संबंधी विषयों में रुचि होने के कारण मेरे अनुसार यह एक सुंदर रचना है।लेखिका को मेरी तरफ से बहुत-बहुत बधाई। कृपया मेरी रचनाओं को भी प्रोत्साहन दें।