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आर्मी ट्रक और बक्सा

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बचपन में जब हम कोई छह सात साल के रहे होंगे, घर के पीछे वाले दरवाज़े से शर्मा आंटी के घर भागने में हम दोनों भाई बहन को बहुत मज़ा आता था।आंटी हमें देखकर खुश हो जाती थीं।हम घन्टों उनके छोटे से बेटे ...

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लेखक के बारे में

स्त्रियों का जीवन सम्वेदनशीलता को प्राधान्य देता है समाज में मेरे इर्द गिर्द की औरतों में कहानियाँ ढूंढ लेती हूँ। जन्म स्थल झांसी सम्प्रति नागपुर से

समीक्षा
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  • author
    monica lal
    04 अगस्त 2021
    बचपन की यादें ताजा हो गई...युद्ध और माता पिता की हिदायतें ब्लैकआउट्स...आर्मी के ट्रक और उनका मार्च...गर्व है भारतीय सेना पर...लेकिन शहीदों को श्रद्धांजलि देकर इति नहीं करनी चाहिए बल्कि उनके परिवार को भी संभालना सरकार वा हम सबका कर्तव्य है...उत्तम रचना
  • author
    Jyoti Bajpai
    23 मार्च 2019
    और हम सब एहसान फरामोश है जो कुछ समय बाद उनको भूल जाते है । कभी भी उनके परिवार की मदद भी नही करते उल्टा बहुत से लोग परेशान जरूर करते है ।😠😢😦😢
  • author
    20 अक्टूबर 2021
    इस तरह की सैनिकोंकी, जवानों की ह्रदयस्पर्शी सत्यकथायें भावुक होनेपर, रोनेपर मजबूर कर देती है. उनका बलिदान, उनके प्रति श्रध्दा बढाता है. कोटी कोटी प्रणाम शहिदोंको!!!
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    monica lal
    04 अगस्त 2021
    बचपन की यादें ताजा हो गई...युद्ध और माता पिता की हिदायतें ब्लैकआउट्स...आर्मी के ट्रक और उनका मार्च...गर्व है भारतीय सेना पर...लेकिन शहीदों को श्रद्धांजलि देकर इति नहीं करनी चाहिए बल्कि उनके परिवार को भी संभालना सरकार वा हम सबका कर्तव्य है...उत्तम रचना
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    Jyoti Bajpai
    23 मार्च 2019
    और हम सब एहसान फरामोश है जो कुछ समय बाद उनको भूल जाते है । कभी भी उनके परिवार की मदद भी नही करते उल्टा बहुत से लोग परेशान जरूर करते है ।😠😢😦😢
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    20 अक्टूबर 2021
    इस तरह की सैनिकोंकी, जवानों की ह्रदयस्पर्शी सत्यकथायें भावुक होनेपर, रोनेपर मजबूर कर देती है. उनका बलिदान, उनके प्रति श्रध्दा बढाता है. कोटी कोटी प्रणाम शहिदोंको!!!