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अपना हाथ जगन्नाथ

4.8
66

'अपना हाथ जगन्नाथ '       सोनू अपनी बूढ़ी दादी के साथ एक छोटे कस्बे में रहता था। उसके माँ-बाप नहीं थे, सोनू को उनकी याद भी नहीं थी। सोनू की एकमात्र सहारा उसकी दादी माँ थी, ...

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लेखक के बारे में
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Shilpi Saxena

हिंदी साहित्य जीवन की वास्तविकता दिखानेवाला दर्पण है ।हिंदीभाषी होने के कारण यह मुझे विशेष रूप से प्रिय है।लिखने-पढ़ने की अभिरुचि मुझे प्रतिलिपि के मंच पर ले आई है।छोटे से दिल में एक छोटी सी आशा रखती हूँ ----मानव हूँ इसी रूप में सदा पहचानी जाऊँ।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Savita Johari
    09 सितम्बर 2020
    Bahut kuchh sikhati h ye apki sunder rachna..Good
  • author
    SangSaj
    07 सितम्बर 2020
    बहुत ही प्रेरणादायक रचना, एक संदेश और सीख देती हुई।
  • author
    Samir kumar
    07 सितम्बर 2020
    बच्चों और बड़ो सभी को बेमिसाल सीख देती हुई कहानी।
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    Savita Johari
    09 सितम्बर 2020
    Bahut kuchh sikhati h ye apki sunder rachna..Good
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    SangSaj
    07 सितम्बर 2020
    बहुत ही प्रेरणादायक रचना, एक संदेश और सीख देती हुई।
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    Samir kumar
    07 सितम्बर 2020
    बच्चों और बड़ो सभी को बेमिसाल सीख देती हुई कहानी।