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अपने तड़पने की मैं तदबीर पहले कर लूँ

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अपने तड़पने की मैं तदबीर पहले कर लूँ तब फ़िक्र मैं करूँगा ज़ख़्मों को भी रफू का। यह ऐश के नहीं हैं या रंग और कुछ है हर गुल है इस चमन में साग़र भरा लहू का। बुलबुल ग़ज़ल सराई आगे हमारे मत कर सब हमसे ...

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लेखक के बारे में
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मीर तकी मीर

परिचय मूल नाम : मोहम्मद तकी जन्म : 1723 आगरा (अकबरपुर) भाषा : उर्दू, फारसी निधन - 21 सितम्बर 1810 ( लखनऊ )

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    prem kumar
    11 अक्टूबर 2022
    bejod.... meer sahab ki gajal
  • author
    विनीता मिश्रा
    25 अक्टूबर 2019
    वाह
  • author
    Ashutosh Kumar
    01 जनवरी 2019
    बहुत खुब
  • author
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  • author
    prem kumar
    11 अक्टूबर 2022
    bejod.... meer sahab ki gajal
  • author
    विनीता मिश्रा
    25 अक्टूबर 2019
    वाह
  • author
    Ashutosh Kumar
    01 जनवरी 2019
    बहुत खुब