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अपना कोई नाम

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अपना कोई नाम कहाँ से कहाँ बहती हो कहाँ बहती हो सुबह से शाम शाम से सुबह तक कई धारा में बँटी तुम लिए असंख्य नाम भटकती हुई जीती जाती हो कई जीवन एक साथ सुबह की गीली ओस में पगडंडी बन तुम ही तय करती हो ...

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लेखक के बारे में
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सरिता कुमारी

शिक्षा- एम. ए. (संस्कृत), इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहबाद कार्यक्षेत्र-भारतीय राजस्व सेवा(आय कर) कृतियाँ - कविता संग्रह- "अनुभूति" (वर्ष 2014), "एक टुकड़ा धूप का"( वर्ष 2015) में प्रकाशित कहानी संग्रह 'उजालों के रंग' शीर्षक से - अनुज्ञा बुक्स, 1/10206,लेन नं. 1E, वेस्ट गोरख पार्क, शाहदरा, दिल्ली -110032, email : [email protected], [email protected], फोन : 011 - 22825424, 09350809192 www : anuugyabooks.com से वर्ष 2018 में प्रकाशित। कई कहानियाँ, 'साहित्य अमृत', प्रतिलिपि. कॉम की ई पत्रिका 'प्रतिलिपि लेखनी', कथाक्रम', 'परिकथा', 'वागर्थ', 'कथादेश',' इंद्रप्रस्थ भारती',' पाखी',' नया ज्ञानोदय', 'निकट', 'आधुनिक साहित्य',' हिन्दी चेतना', 'भवन्स नवनीत', 'कादम्बिनी', 'वार्षिक पुनर्नवा',' वार्षिक लोकमत विशेषांक', समाचारपत्र 'दैनिक जागरण',' जनसत्ता', 'दैनिक भास्कर' आदि में प्रकाशित।

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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Anubhav Singh
    11 अक्टूबर 2015
    "सुबह की गीली ओस में ...... पगडंडी बन ......... ". सारगर्भित अभिवयक्ति
  • author
    Anil Analhatu
    27 अक्टूबर 2015
    बहुत अच्छी कविता। स्त्री के संघर्षों और उसकी नियति का यह विरल आख्यान है। सबको नाम देती स्त्री खुद अनाम हो जाती है , खोजती हुई सी - अपना कोई नाम। घर-खेत और खेत-घर तथा घर-कार्यालय और कार्यालय - घर  शब्द - युग्मों का अभिनव प्रयोग इसे अर्थान्विति के नए आयामों तक ले जाता है। बधाई सरिता जी।
  • author
    ankush kapoor
    12 अक्टूबर 2015
    Words flowing like a lively river..at times peacefull..at times raging..and at times just flowing at leisurely pace !
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    Anubhav Singh
    11 अक्टूबर 2015
    "सुबह की गीली ओस में ...... पगडंडी बन ......... ". सारगर्भित अभिवयक्ति
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    Anil Analhatu
    27 अक्टूबर 2015
    बहुत अच्छी कविता। स्त्री के संघर्षों और उसकी नियति का यह विरल आख्यान है। सबको नाम देती स्त्री खुद अनाम हो जाती है , खोजती हुई सी - अपना कोई नाम। घर-खेत और खेत-घर तथा घर-कार्यालय और कार्यालय - घर  शब्द - युग्मों का अभिनव प्रयोग इसे अर्थान्विति के नए आयामों तक ले जाता है। बधाई सरिता जी।
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    ankush kapoor
    12 अक्टूबर 2015
    Words flowing like a lively river..at times peacefull..at times raging..and at times just flowing at leisurely pace !