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अनमोल प्यार।।

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हम रूह से प्यार करते हैं जिस्म से नहीं, खरीदे जिस्म जाते हैं,रूह नहीं। बाजार तो कई मिल जाएंगे जिस्म के खरीदार के लिए पर जो रूह को खरीद ले दुनिया में ऐसा कोई बाजार नहीं। ...

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लेखक के बारे में
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Ajit Kumar Yadav

वक्त है साहब बदलता जरूर है, दिखता नहीं पर दिखाता जरूर है।

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Anita verma
    22 जुलाई 2022
    awesome
  • author
    Astha
    21 जून 2022
    waah
  • author
    🧁🇰ꪖ𝘃𝚢ã🧁
    05 मई 2022
    behtreen👏👏👏
  • author
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    Anita verma
    22 जुलाई 2022
    awesome
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    Astha
    21 जून 2022
    waah
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    🧁🇰ꪖ𝘃𝚢ã🧁
    05 मई 2022
    behtreen👏👏👏