
प्रतिलिपिआज बुढ़ापे के मोड़ पर लेटे लेटे अपने अतीत को याद कर रही थी | कैसे एक गुंडे की विधवा होने उसने दोबारा घर बसाया.और सब खुशियां दोबारा मिली जो किसी और के हिस्से क थी| किसी की सौतन बन कर इस घर में आयी थी | जब घर के लोग उस पर जुर्म करते ताने मरते, मुझे कभी उस पर तरस नहीं आया |शायद कभी खुद भी लोगो का साथ दिय ा उसे परेशान करने में| वो बच्चा पैदा नहीं कर सकती थी शायद इसी लिए मैं इस घर में आ पायी थी | उस समय उसका दर्द मैं महसूस नहीं कर पाती थी | उससे कहीं न कहीं नफरत थी मन में, जब के उसे नफरत करनी चाहिए...
रिपोर्ट की समस्या
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