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अंजाम-ए-मुहब्बत!

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** नज़्म ** गोया की उनको हमसे... मुहब्बत नहीं रही! हमें भी उनको पाने की... हसरत नहीं रही! ढलती उमर में उनकी वाजिब है शिकायत, वो शोखियां वो हुस्न... वो शरारत नहीं रही! कसकर अपनी बाँहों ...

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लेखक के बारे में

राजेश पाण्डेय "घायल"

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Sanjay Ni_ra_la
    31 मई 2021
    कल काव्यपाठ में आपने sabdon से mehfil में आग लगा दिए थे आप... अभी कहां हार मान कर बैठते हो तुम रकिबों को क्यूँ आजाद छोड़ते हो तुम एक आवाज पर निराला दौड़ा आएगा अपने आप को क्यूँ इतना सताते हो तुम
  • author
    आशा रानी शरण
    31 मई 2021
    तब दिल का मर्ज था अब दिल का मरीज हूं फिर दिल से खेलने की हिम्मत नहीं रही वाह बहुत सुंदर बहुत बढ़िया लिखा आपने धन्यवाद नमस्कार।
  • author
    Aruna Soni
    31 मई 2021
    दिल के मरीज़ों को बचकर रहना चाहिए, 👌👌 ऐ- मुहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया... बहुत बढ़िया, रोज़ की तरह 👌👌🌹🌻🌹🌻🙏🌷
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    Sanjay Ni_ra_la
    31 मई 2021
    कल काव्यपाठ में आपने sabdon से mehfil में आग लगा दिए थे आप... अभी कहां हार मान कर बैठते हो तुम रकिबों को क्यूँ आजाद छोड़ते हो तुम एक आवाज पर निराला दौड़ा आएगा अपने आप को क्यूँ इतना सताते हो तुम
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    आशा रानी शरण
    31 मई 2021
    तब दिल का मर्ज था अब दिल का मरीज हूं फिर दिल से खेलने की हिम्मत नहीं रही वाह बहुत सुंदर बहुत बढ़िया लिखा आपने धन्यवाद नमस्कार।
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    Aruna Soni
    31 मई 2021
    दिल के मरीज़ों को बचकर रहना चाहिए, 👌👌 ऐ- मुहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया... बहुत बढ़िया, रोज़ की तरह 👌👌🌹🌻🌹🌻🙏🌷