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तारों की छाँव में देर रात तक छत पर बैठ रात के दूसरे पहर की प्रतीक्षा करती जब बाँसुरी की मनमोहिनी तान गहरी खामोशी को भेदती हुई उस तक पहुँचती। उसकी विह्वलता वैसी ही होती जैसे कस्तूरी की तलाश में ...