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अमर प्रेम

4.5
2046
लघुकथालघुकथा

प्रकृति और प्रकृति के सहवासी जीव जन्तुओ के मध्य आपसी प्रेम हमेशा दृष्टीगोचर होता है |मनुष्य का अपने सहवासी पक्छियो,एवम् जानवर से लगाव स्वाभाविक होता है |इसमें कुत्ता एक ऐसा जानवर है जिसके साथ अलग अलग ...

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लेखक के बारे में
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अमिताभ कुमार

शिक्षा : एम् ए (हिंदी,अंग्रेजी )

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

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  • author
    RSP Pandey
    22 फ़रवरी 2020
    सबसे पहले डिस्क्लेमर पर बात करें तो लोगों को क्या लगता है सोचने की आवश्यकता नहीं.. यह तो निश्चित ही है कि अधिकांश मानवीय संबंधों का आधार अहम, वहम और स्वार्थ है जबकि मानव के अतिरिक्त किसी जीवधारी में ऐसा नही है वहाँ प्रेम शुद्ध ,निःस्वार्थ,और त्याग आधारित है । कुछ शब्द ठीक से न लिखे होना अच्छा नही लगा जैसे स्वदेसी, हमेसा,दिवार, स्पस्ट आदि इन्हें सही रूप स्वदेशी, हमेशा,दीवार, स्पष्ट लिखा जाता तो और सुसंगत होता । प्रयास अच्छा है शुभकामनाएं
  • author
    अनुराग "Anu dandare"
    16 मार्च 2018
    सत्य है आपने तो कुत्ते के बारे मे बताया है, मेरे घर मैने बिल्ली के बच्चे और मेरे मिठ्ठू को देखा है कि किस तरह वो एक दूसरे से बात करते थे 😊😊👌 दुर्भाग्यवश अब दोनो ही नही रहे पर उनकी स्मृतियां आज भी मानस मे है।
  • author
    Khushboo Mehra
    12 मई 2022
    prem karne ka adhikaar to sabhi ko hai
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    RSP Pandey
    22 फ़रवरी 2020
    सबसे पहले डिस्क्लेमर पर बात करें तो लोगों को क्या लगता है सोचने की आवश्यकता नहीं.. यह तो निश्चित ही है कि अधिकांश मानवीय संबंधों का आधार अहम, वहम और स्वार्थ है जबकि मानव के अतिरिक्त किसी जीवधारी में ऐसा नही है वहाँ प्रेम शुद्ध ,निःस्वार्थ,और त्याग आधारित है । कुछ शब्द ठीक से न लिखे होना अच्छा नही लगा जैसे स्वदेसी, हमेसा,दिवार, स्पस्ट आदि इन्हें सही रूप स्वदेशी, हमेशा,दीवार, स्पष्ट लिखा जाता तो और सुसंगत होता । प्रयास अच्छा है शुभकामनाएं
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    अनुराग "Anu dandare"
    16 मार्च 2018
    सत्य है आपने तो कुत्ते के बारे मे बताया है, मेरे घर मैने बिल्ली के बच्चे और मेरे मिठ्ठू को देखा है कि किस तरह वो एक दूसरे से बात करते थे 😊😊👌 दुर्भाग्यवश अब दोनो ही नही रहे पर उनकी स्मृतियां आज भी मानस मे है।
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    Khushboo Mehra
    12 मई 2022
    prem karne ka adhikaar to sabhi ko hai