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आखिर कब होगी सुबह .....

4.6
1985

भेदभाव सदियों से रहा है ,पुरुषों के मन में जब बात आती है औरत की , वेद हो या पुराण, रामायण या महाभारत, बताती हैं हमारे ग्रंथो की पौराणिक कहानियां , कौन नहीं जानता अहिल्या की कहानी , बलि चढ़ गयी थी...

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लेखक के बारे में
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ममता जोशी
समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Neha Joshi
    12 अक्टूबर 2015
    Very well written n it truly describes today's situation.
  • author
    Vinay Mehta
    12 अक्टूबर 2015
    आज के कुसंगित सामजिक संदर्भ में लिखी यह पंक्तियाँ स्पष्ट करती है की स्त्री का शोषण बहुत हुआ अब यही रुकना आवश्यक है ... इस मानसिकता में बदलाव आवश्यक है ...  सुंदर लेखनी ममता जी  ....  
  • author
    Ritu Chaudhary
    12 अक्टूबर 2015
    Really True. So, its now the time when we girls have to change/or had changed already bcoz mens will still remain the same... RESPECT 
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  • author
    Neha Joshi
    12 अक्टूबर 2015
    Very well written n it truly describes today's situation.
  • author
    Vinay Mehta
    12 अक्टूबर 2015
    आज के कुसंगित सामजिक संदर्भ में लिखी यह पंक्तियाँ स्पष्ट करती है की स्त्री का शोषण बहुत हुआ अब यही रुकना आवश्यक है ... इस मानसिकता में बदलाव आवश्यक है ...  सुंदर लेखनी ममता जी  ....  
  • author
    Ritu Chaudhary
    12 अक्टूबर 2015
    Really True. So, its now the time when we girls have to change/or had changed already bcoz mens will still remain the same... RESPECT